चिदंबरम ने कहा, ‘अगर सरकार ने आर्थिक सर्वे पढ़ा होता, तो लगता है उसने उसे नज़रअंदाज़ करने का फैसला किया है और लोगों पर शब्द—अक्सर संक्षिप्त शब्द (एक्रोनिम)—फेंकने की अपनी पसंदीदा आदत पर लौट आई.’
उद्योग और रोज़गार बढ़ाने के लिए 2024 में शुरू की गई UNNATI योजना के दो साल बाद भी बजट में सीमित फंडिंग दिखी. पर्यटन और अगरवुड खेती के ज़रिए ही मामूली समर्थन दिया गया.
औपनिवेशिक खुफिया तंत्र क्रांतिकारियों को व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि खतरे के रूप में दर्ज करता था. ऐसा करके उसने कई ज़िंदगियों को इतिहास से निष्कासित कर दिया.