समीक्षा के मुताबिक, आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहने और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में सुधार का असर धीरे-धीरे दिखने से महंगाई का माहौल फिलहाल नरम बना हुआ है.
जोखिम खत्म नहीं हुआ है. इसका रूप बदल गया है—यह नॉन-परफॉर्मिंग लोन की वजह से बैलेंस शीट पर दबाव से हटकर तेजी से बढ़ते डिजिटल सिस्टम को संभालने की ऑपरेशनल चुनौतियों में बदल गया है.