समाज में बढ़ते विरोध के बाद आनंदी ने कहा मैं सिर्फ डॉक्टरी की शिक्षा के लिए अमेरिका जा रही हूं, मेरी इच्छा नौकरी करने की नहीं बल्कि लोगों की जान बचाने की है.
सफल आदमी को अपना संघर्ष खुद लिखने की आजादी होती है. असफल का संघर्ष कोई सुनना नहीं चाहता और सफल के असफल अनुभव भी रोचक लगते हैं. बारहवीं फेल होना आज मनोज शर्मा का यूएसपी बन गया है.
व्यवस्था पर सवाल उठाते ही व्यक्ति का गुम हो जाना और उसकी गुमशुदगी को सांप्रदायिक लिवास में उढाना और ये दिखाना कि सबकुछ सामान्य है....यही चंदन पाण्डेय की उपन्यास 'वैधानिक गल्प' के लिखने की बैचेनी को दर्शाता है.
शिक्षक द्वारा किए गए कुछ प्रयासों का परिणाम है कि ज्यादातर बच्चे हस्तकला में दक्ष तो हो ही रहे हैं, उनमें सौंदर्यबोध भी विकसित हो रहा है और वे पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बन रहे हैं.
परवेश्वरन दीनदयाल अनुसंधान संस्थान के निदेशक भी बने जहां वे 1982 तक कार्य करते रहे. फिर उन्होंने केरल में काम करने का सोचा और एक नया संगठन भारतीय विचार केंद्रम को सुव्यवस्थित आकार देने का निश्चय किया.
फरवरी का महीना है. यानी कि बसंत है. फ़िज़ा में एक अलग महक, प्रकृति प्रेमियों का सबसे प्यारा महीना और प्रेमियों के इज़हार का असल वक़्त. काफी कुछ है इस महीने में करने को. प्रेम की मुकम्मल यात्रा का खूबसूरत पड़ाव है बसंत.
दलित पैंथर आंदोलन की गतिविधियों की दृष्टि से मई 1972 से लेकर जून 1975 तक की अवधि सबसे महत्वपूर्ण थी. इस काल में दलित पैंथर आंदोलन ने तूफान-सा बरपा दिया था.
हमारे देश में एक इलाका ऐसा भी है, जहां हिंदू होने के बाद भी आबादी के एक हिस्से को दाह संस्कार से वंचित होना पड़ रहा है और यह उस तबके की कहानी है जिसे श्मशान घाट का राजा माना जाता है.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.