भारतीय संगीत परंपरा में एक ऐसा सितारा भी हुआ है जो अपनी पहचान अलग से बनाए हुए है और अपने जाने के 40 बरस बाद भी दिलकश आवाज़ के जरिए हमारे दिलों पर राज कर रहा है.
प्रेमचंद की लेखनी में तो आकर्षक तत्व हैं हीं लेकिन उन रचनाओं के किरदार भी कम अपनी तरफ नहीं खींचते हैं और हमें उस हकीकत के सामने लाकर खड़ा कर देते हैं जो हूबहू उनकी कहानियों की तरह हमारे भी दैनिक जीवन से होकर गुजरती हैं.
दिल तोड़ के गाने को केवल 24 घंटों में एक करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है. जैसे-जैसे लोगों को पता चल रहा है कि इस गाने का वो बाइक वाला लड़का रीयल लाइफ में IAS है तो वो और भी पसंद किए जा रहे हैं.
मोहन जोशी हाज़िर हो सिनेमा के अक्ष में भीष्म साहनी को मौजूदा वक्त में देखना और समझना इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि देश के तमाम बड़े शहरों के आलीशान इमारतों का जो सच हमारे सामने दिखता है...उसकी पूरी तस्वीर उन शहरों के चॉल और झुग्गी बस्तियों से होकर गुज़रती है.
बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखे वंदे मातरम गीत को हिंदू-मुस्लिम दोनों ने ही आजादी का तराना बनाया पर इसके कुछ अंशों में देवी-देवताओं की बात होने से मुस्लिम इसे राष्ट्रीय गीत बनाने के खिलाफ हो गए थे.
रणनीतिक तौर पर, बिना शर्ट वाला यह प्रदर्शन आत्मघाती गोल से भी बुरा था. अचानक, AI समिट की सारी गड़बड़ियां भूला दी गईं और यूथ कांग्रेस का विरोध ही मुद्दा बन गया.