फिल्म 'पठान' हाल ही में सर्टिफिकेशन के लिए सीबीएफसी परीक्षा समिति के पास पहुंची और बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार फिल्म की उचित और पूरी तरह से जांच की गयी.
पेश है दिप्रिंट का राउंड-अप कि कैसे उर्दू मीडिया ने पिछले सप्ताह के दौरान विभिन्न समाचार संबंधी घटनाओं को कवर किया और उनमें से कुछ ने इसके बारे में किस तरह का संपादकीय रुख इख्तियार किया.
जिस ध्वज को खत्म करने, नीचे गिराने के लिए अनेक क्रांतिकारियों, अनेक सत्याग्रहियों ने गोलियाँ खाईं, अत्याचार सहे, वही यूनियन जैक स्वतंत्रता दिवस के साथ ही और 12 प्रमुख दिनों में भारत की सभी शासकीय इमारतों पर फहरनेवाला है!
एक IAS ASPIRANTS की रोमांचक सक्सेस स्टोरी’ प्रभात प्रकाशन से छपी किताब में पढ़ाई के दिनों में आईएएस की तैयारी करने वाला लड़का क्या क्या सोचता है, इसकी मजेदार कहानियां लिखी हैं पीयूष रोहनकर, DANICS ने.
‘अजय वर्द्धन’ व ‘त्राहिमाम’ जैसी फिल्में भी आई हैं और अन्य भाषाओं की फिल्में भी देश के अलग-अलग हिस्सों व विभिन्न ओ.टी.टी. मंचों पर रिलीज हुई हैं लेकिन ये सारी की सारी बेहद ठंडी हैं और इन्हें कोई नहीं पूछ रहा है.
किशोरावस्था तक का उनका जीवन जीविका के लिए मवेशी चराने और मेहनत-मजदूरी करने जैसे कामों में ही बीत गया. 12 साल की उम्र में प्लेग से माता-पिता को खोने के बाद उन्होंने पास के मंधना स्टेशन पर कचालू भी बेचे.
शाह तब तक अराजनीतिक शख्स से ऊपर उठ कर हर जगह राजनीति देखने लगे थे. यहां तक कि उन्होंने साल 2002 के गुजरात दंगों के लिए मिर्जा से माफी भी मांगी थी. मिर्जा ने पूछा भी था कि उन्हें इससे क्या लेना-देना?
बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में क्या गलत हो गया है? कई मुख्यमंत्रियों की ढीली-ढाली सरकार इस सोच से निकलती है कि चुनावी जीत तीन ‘एम’ की वजह से मिली—मोदी, बहुसंख्यकवाद और पैसा.
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना’ (सीपीसी) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय...