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Wednesday, 1 April, 2026
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आसिम मुनीर के पास अब पांच स्टार हैं, पर सफलता ज़ीरो—अब वह और भी ख़तरनाक साबित हो सकते हैं

मुनीर ने इमरान को जेल में बंद कर रखा है, अपने हाथों की कठपुतली संसद से उन्होंने अपना कार्यकाल भी बढ़वा लिया है लेकिन पांचवें स्टार तमगे की चमक जमीनी हकीकतों को फीकी नहीं कर सकती.

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दुनिया का समर्थन नहीं मांग रहे, वह केवल नैरेटिव को संभाल रहे हैं

प्रतिनिधिमंडल एकता को दर्शाने का अच्छा काम कर रहे हैं. हमें घर पर भी इन मूल्यों को बनाए रखना चाहिए.

जातिगत असंतुलन से डगमगाता हिंदुत्व प्रोजेक्ट, यूपी में बीजेपी के सामने खड़ी होती नई चुनौती

आखिर क्षेत्रीय या राज्य स्तर पर ऐसा क्या घटा था जिसके कारण चुनावी राजनीति का पूरा चरित्र ही बदल गया? जबकि राजनीतिक तौर पर उत्तर प्रदेश पिछड़ों और दलित राजनीतिक चेतना को अभिव्यक्त करने वाले राजनीतिक दलों का मज़बूत उदाहरण पेश करता रहा है.

बांग्लादेश में यूनुस की ‘पहले सुधार, फिर चुनाव’ योजना को नहीं मिला समर्थन — अब फैसला ज़रूरी

अवामी लीग पर प्रतिबंध बांग्लादेश में गहरी राजनीतिक अस्थिरता के संकेत देते हैं. हाल में जो घटनाएं घटी हैं उनके कारण बड़ी चिंता यह उभरी है कि अंतरिम सरकार बच पाएगी या नहीं.

महत्त्वाकांक्षी PMFBY योजना विफल हो रही है. इसमें पहले की योजनाओं जैसी ही खामियां हैं

इस योजना की एक बुनियादी खामी मुआवजे के दावों के निबटारे की अभेद्य, जटिल, और बेहद तकनीकी किस्म की प्रक्रिया है.

जातिगत जनगणना का रास्ता AIADMK ने बनाया, इतिहास इसे रखेगा याद : एडप्पादी के. पलानीस्वामी

तमिलनाडु 69 फीसदी आरक्षण की नीति के साथ सकारात्मक कार्रवाई को दिशा देता रहा है. वह उपलब्धि किसी संयोग से नहीं बल्कि एआईडीएमके के राजनीतिक संकल्प और संवैधानिक कौशल के बूते हासिल हुई थी.

ट्रंप के भ्रष्टाचार ने अमेरिका की दुनिया में पकड़ कमजोर कर दी है. भारत अब उस पर भरोसा नहीं कर सकता

भारत जिन लक्ष्यों की परवाह करता है—चीन पर नियंत्रण रखना, पाकिस्तान में जिहादियों को निशाना बनाना, व्यापार मार्गों और ऊर्जा की सुरक्षा सुनिश्चित करना—वे ट्रंप को ज़्यादा मायने रखते नहीं दिखते.

ऑपरेशन सिंदूर से बना बिहार में माहौल — फिर भी दुश्मनों और मित्र-शत्रुओं के बीच नीतीश क्यों हैं परेशान

तेजस्वी, पीके, मोदी-शाह, चिराग—क्यों नीतीश कुमार का जाना सभी की राजनीति के लिए फायदेमंद है.

न्यायिक सक्रियता या अतिक्रमण? राष्ट्रपति के सवालों से उठी नई बहस

यह पहला मौका है जब बिना राष्ट्रपति या राज्यपाल की स्वीकृति के विधेयक कानून बन गए हैं. यह न्यायपालिका द्वारा अपनी संवैधानिक शक्तियों और मर्यादा का अतिक्रमण है.

खतरे अभी खत्म नहीं हुए हैं, भारत को अपनी किलेबंदी करनी ही पड़ेगी

भारत को खुद को सिंदूर दुर्ग में बदलना चाहिए, एक अभेद्य किला, जो ज़मीन, समुद्र, हवा या साइबरस्पेस से आने वाले बहु-क्षेत्रीय खतरों से सुरक्षित हो.

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मलयालम फिल्म निर्देशक रंजीत को यौन उत्पीड़न के प्रयास के मामले में हिरासत में लिया गया

कोच्चि, 31 मार्च (भाषा) मलयालम फिल्म जगत के जाने-माने निर्देशक रंजीत को यौन उत्पीड़न के प्रयास के एक मामले में मंगलवार शाम हिरासत में...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.