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Tuesday, 31 March, 2026
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अफ़ग़ानिस्तान भूख से तड़प रहा है और उसके किसान अफीम की खेती बचाने के लिए लड़ रहे हैं

अफ़ग़ान किसानों को अफ़ीम की खेती से छुटकारा दिलाने में दुनिया की साझा रुचि है. लेकिन बार-बार, दुनिया उन्हें और ज़हरीली फ़सल से मारे गए युवा अफ़ग़ानों को उनके हाल पर छोड़ देती है.

ईरान-इज़राइल को ज़रूरत है साझे फायदे वाले समाधान की, न कि युद्धोन्मादी टकराव की

अब देखना यह है कि यह युद्धविराम घरेलू मजबूरियों और दोनों पक्ष की थकान के मद्देनजर किया गया एक सुविधाजनक उपाय है या स्थायी शांति की ओर बढ़ाया गया एक कदम.

लिबर्ल्स क्यों चाहते हैं कि हिंदुत्व के दौर में मुस्लिम महिलाएं अपना हक़ न मांगे

जैसा कि बनू मुश्ताक की इंटरनेशनल बुकर जीतने वाली किताब 'हार्ट लैम्प' दिखाती है, न्याय की मांग करने वाली मुस्लिम महिलाएं न तो किसी कल्पना का हिस्सा हैं और न ही किसी राजनीतिक साज़िश का.

कोलकाता लॉ कॉलेज रेप मामला दिखाता है कि TMC सरकार के लिए महिलाओं से ज्यादा पार्टी के गुंडे अहम हैं

टीएमसी ने यूनिवर्सिटी की राजनीति को जिस तरह अपने कब्ज़े में ले लिया है, वह पश्चिम बंगाल की महिलाओं के लिए बड़ा खतरा है. मोनोजित मिश्रा जैसे लोगों को कैंपस से दूर रखना बेहद ज़रूरी है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ओवैसी को राइट विंगर्स ने सराहा, लेकिन सेक्युलर पार्टियों ने क्यों बनाई दूरी

सेक्युलर पार्टियों को लगता है कि ओवैसी का मोदी सरकार का साथ देना—चाहे आतंकवाद के मुद्दे पर ही क्यों न हो—उन्हें मुस्लिम वोटरों से दूर कर सकता है. अब बिहार चुनाव में ओवैसी को यह धारणा गलत साबित करनी होगी.

दलाई लामा ने किया पुनर्जन्म का ऐलान, लेकिन उत्तराधिकारी को मिले शायद सिर्फ कल्पना का तिब्बत

अगर दलाई लामा का उत्तराधिकारी तिब्बत से चुना गया, तो चीन का रुख साफ है—वह न भारत की सुनेगा, न पश्चिमी देशों की.

‘वोटबंदी’ की नई साजिश, बिहार में चुनाव से पहले नागरिकता की तलाशी

भारी बारिश से क्या-क्या धुलेगा, क्या-क्या बहेगा, कहा नहीं जा सकता, लेकिन चुनाव आयोग के इस बरसाती अभियान कईओं की नागरिकता और वोट देने के अधिकार को ज़रूर बहा ले जाएगा!

इस सच से रूबरू हो जाएं भारतीय मुसलमान: मुस्लिम मुल्कों को उनकी कोई परवाह नहीं

मुस्लिम संसार में इज्ज़त हासिल करने का एक ही तरीका है भारतीय मुसलमानों के पास: भारतीय बनिए और अपने मुसलमानत्व को भारतीयता के अंदर दाखिल कीजिए.

लोकतंत्र की असली परीक्षा: भारत को पहले ‘नेक चुनाव’ चाहिए, ‘एक चुनाव’ नहीं

राज्य और पार्टी का घाल-मेल कम्युनिस्ट तानाशाहियों की विशेषता रही है. पश्चिमी लोकतंत्र में कहीं ऐसा नहीं, पर भारत में वही कर डाला गया, जो संविधान को व्यवहार में तहस-नहस करके हुआ.

कच्छ से सीख, सिंदूर से संकेत: आसिम मुनीर के लिए भारत को 6 महीने, 2 और 5 साल की ठोस रणनीति की ज़रूरत

कच्छ पाकिस्तान के साथ हमारी सबसे भुला दी गई जंग है. उससे सीखने और अगले छह महीने, दो साल और पांच साल की योजना बनाने की ज़रूरत है.

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उपराज्यपाल से मिले दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष, कृषि भूमि का सर्कल रेट बढ़ाने की मांग की

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) कांग्रेस की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने मंगलवार को उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू से मुलाकात की और...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.