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Saturday, 18 January, 2025
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नेशनल इंट्रेस्ट

1991 में कड़ी मशक्कत के बाद मिली आर्थिक आज़ादी से भारत पिछड़ रहा, उसकी रक्षा के लिए आज कोई सुधारक नहीं

इस हफ्ते इस कॉलम के लिए बिल्कुल माकूल तीन मुद्दे सामने थे: पुरानी, ​​गरीबी दूर करने वाले ट्रेंड वापस आ गए हैं, स्टील इंडस्ट्री इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की पैरवी कर रहा है; आर्थिक सुधारों के एडी श्रौफ सरीखे पैरोकार आज दिख नहीं रहे.

ICC चैंपियन्स ट्रॉफी के लिए भारत को पाकिस्तान जाने की ज़रूरत नहीं, तर्कों को खारिज कर दीजिए

इस उपमहादेश में क्रिकेट वाले रिश्ते खेल से जुड़े विवाद की वजह से नहीं, न ही हिंदू-मुस्लिम मसले के कारण बल्कि इन मुल्कों के हालात और उनके आपसी मनमुटाव की वजह से बिखरे हैं.

अमेरिका ने लगाया अभियोग, बाज़ार ने सुनाया दंड, यह नुकसान अडाणी को लंबे वक्त तक सताएगा

सेबी नए सिरे से जांच शुरू कर सकता है; संसद हंगामे से शुरू होगी और विदेशी पूंजी अडाणी के लिए दुर्लभ हो जाएगी यानी इस बार नुकसान गहरा और दूरगामी होगा.

चीन-पाकिस्तान से जुगाड़ू फॉर्मूले के बूते नहीं लड़ सकता है भारत, सेना का बजट बढ़ाने की ज़रूरत

भारत को अपने दोनों प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ साफ प्रतिरोध क्षमता हासिल करनी होगी. चीन के मामले में ऐसा उसे हमला करने की बड़ी कीमत चुकाने का डर पैदा करके किया जा सकता है, तो पाकिस्तान को दंड का डर पैदा करके किया जा सकता है.

ट्रंप और मोदी को तो चुनाव जीतने का कारगर फॉर्मूला मिल गया, राहुल इसकी खोज में जुटे

2024 के मोदी उन तीन सूत्रों पर सवार नहीं थे जिन्होंने उन्हें दो बार बहुमत दिलाया था और जिसने अभी-अभी ट्रंप को फिर से सत्ता दिलाई है. मोदी सिर्फ उसे बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे जो उन्हें हासिल था.

कनाडा में सिख बागियों के ‘गैंगवार’ भारत का सिरदर्द नहीं, यह ठहरकर सोचने का वक्त है

सिख अलगावादी अगर सिरदर्द हैं तो उनके मेज़बान देशों के लिए हैं जहां वह बसे हुए हैं. उनका एक ‘अंडरवर्ल्ड’ है जिसमें गिरोहों के बीच खूनी लड़ाई चलती रहती है और उनके पड़ोसी असुरक्षित होते हैं, तो भारत इस सबसे क्यों परेशान हो?

श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान से सबक: अगर आपको धैर्य नहीं, तो आप लोकतंत्र के काबिल नहीं

श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन को सहजता से अंजाम दिया गया, जबकि बांग्लादेश में इसके विपरीत सत्तासीन नेता को देश छोड़ने पर मजबूर किया गया और ऐसे अ-राजनीतिक लोगों ने कमान थाम ली जो चुनाव जीतने के भी काबिल नहीं हैं.

आप इंदिरा गांधी के मुंह से कोई भी शब्द बुलवा लें, लेकिन भिंडरावाले से ये आपकी मुश्किलें बढ़ा सकता है

छोटा-सा सबक यह है कि आप इंदिरा गांधी के मुंह में तो कोई भी शब्द डाल करके बच सकते हैं, लेकिन भिंडरावाले की मौत के 40 साल बाद भी आपने उसके साथ ऐसा कुछ किया तो मुश्किल में पड़ जाएंगे.

बांग्लादेश के हिंदुओं की रक्षा के लिए PM मोदी की अमेरिका से गुहार, भारत हसीना की हार को अपनी हार न बनाए

बांग्लादेश ने शेख हसीना और अवामी लीग को खारिज कर दिया तो क्या उसके जवाब में हम बांग्लादेश को ही खारिज कर देंगे? हम अपने पड़ोसी नहीं चुन सकते, लेकिन हम खुद कैसे पड़ोसी बनें यह फैसला तो कर ही सकते हैं.

राहुल गांधी कांग्रेस में जान फूंक सकते हैं, लेकिन उन्हें दशकों से बनी राजनीतिक छवि से बाहर आना होगा

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की 99 सीटों पर जीत ने दो दशकों से राहुल गांधी को परेशान कर रहे तीन नुकीले सवालों की धार खत्म तो कर दी है मगर उनके अब तक के सियासी सफर पर भी गौर करना ज़रूरी है.

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केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री पर साधा निशाना

हैदराबाद, 17 जनवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ए...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.