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Saturday, 3 June, 2023
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Budget 2023 : डिफेंस को पिछले साल के मुकाबले 13% ज्यादा, पेंशन और वेतन पर लगभग आधा हिस्सा खर्च होगा

पूंजीगत बजट 1.52 लाख करोड़ से बढ़ाकर 1.62 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. बजट में नेवी और आर्मी के लिए पर्याप्त वृद्धि देखी जा रही है लेकिन विमान, एयरो इंजन की खरीद के लिए आवंटन कम हो गया है.

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नई दिल्ली: 2023-24 के लिए भारत का रक्षा बजट पिछले वर्ष की तुलना में 12.95 प्रतिशत बढ़ाकर 5.93 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. फिलहाल इस बजट में से 1.38 लाख करोड़ रुपये पेंशन और 1.54 लाख करोड़ रुपये सैलरी के मद में चले जाएंगे. 2022-23 में रक्षा बजट के लिए 5.25 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था.

मतलब साफ है, रक्षा बजट का करीब आधा हिस्सा वेतन और पेंशन पर खर्च हो जाएगा. यह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सूचीबद्ध कुल व्यय का 13.18 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद का 3.76 फीसदी है. वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए इसके 157.6 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था. पिछले साल रक्षा पेंशन के लिए 1.19 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.

पूंजीगत बजट यानी कैपिटल बजट सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की जरूरतों को पूरा करता है, मसलन नए उपकरणों और हथियारों की खरीद आदि. इसमें 10,000 करोड़ रुपये की यानी 6.57 प्रतिशत की मामूली वृद्धि की गई है. गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष में पूंजी परिव्यय के लिए बजटीय आवंटन 1.52 लाख करोड़ रुपये था, जिसे नए वित्तीय वर्ष के लिए बढ़ाकर 1.62 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.

दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा पूंजीगत बजट के संशोधित अनुमानों के अनुसार व्यय 1.50 लाख करोड़ रुपये था. गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि भारतीय वायु सेना (आईएएफ) आधुनिकीकरण के लिए रखे गए 55,586 करोड़ रुपये खर्च करने में सक्षम नहीं थी, इसलिए उसने लगभग 2,000 करोड़ रुपये वापस कर दिए.

रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा कि पूंजी आवंटन में 6.57 प्रतिशत की वृद्धि को डॉलर में आए उछाल के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए, जो पिछले साल एक डॉलर की कीमत लगभग 75 रुपये थी, जो अब बढ़कर 81 रुपये हो गई है.

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2017-21 में भारत का वैश्विक हथियारों के आयात में 11 प्रतिशत हिस्सा था. लेकिन सरकार की तरफ से पूंजीगत खरीद का 68 प्रतिशत भारतीय फर्मों के लिए सीमित करने के बावजूद यह सबसे बड़े आयातकों में से एक बना हुआ है.

बजट दस्तावेजों से पता चला है कि चालू वित्त वर्ष के लिए पेंशन के तहत आवंटित धन 1.19 लाख करोड़ रुपये था. संशोधित अनुमानों के तहत यह बढ़कर 1.53 लाख करोड़ रुपये हो गया है.

एक सूत्र ने कहा, ‘वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना के संशोधन के कारण पेंशन बिल में बढ़ोतरी हुई थी.’ उन्होंने इशारा करते हुए कहा कि इसकी वजह से 23,638 करोड़ रुपये की बकाया राशि के भुगतान के अलावा 8,450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक खर्च होगा.

जहां तक पूंजीगत बजट के लिए आवंटन का संबंध है, सरकार ने डिफेंस बजट में ऐसे समय में बढ़ोतरी की है, जब चीन के साथ चल रहे तनाव के साथ-साथ नेवी और आर्मी ने एक पूर्ण आधुनिकीकरण अभियान चलाया हुआ है.

नौसेना और थल सेना दोनों नई तकनीकों की मेजबानी की तलाश कर रहे हैं जिनमें विशेष ड्रोन, लोइटर म्यूनिशन (शस्त्र), छोटे हथियार, हल्के टैंक, मौजूदा टैंकों को अपग्रेड करना और नए नौसैनिक लड़ाकू विमानों के अलावा बख्तरबंद कार्मिक वाहक शामिल हैं.

नौसेना के लिए पूंजीगत बजट बजटीय अनुमानों में 47,590.99 करोड़ रुपये से बढ़ाकर अगले वित्त वर्ष के लिए 52,804.75 करोड़ रुपये किया गया है. चालू वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमानों में पूंजी परिव्यय 47,727 करोड़ रुपये रखा गया है, जिसका मतलब है कि इसने मूल रूप से आवंटित राशि से 137 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए हैं.

वहीं सेना के मामले में पूंजीगत बजट 32,015.23 करोड़ रुपये से बढ़कर 37,241.54 करोड़ रुपये हो गया है. चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमानों से पता चला है कि सेना ने चालू वित्त वर्ष में शुरू में आवंटित राशि से 500 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए हैं.

लेकिन IAF के मामले में देखा जाए तो नए वित्तीय वर्ष के बजट में मामूली सी बढ़ोतरी की गई है. इसे 55,586.65 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 57,137.09 करोड़ रुपये किया गया है.

गहन विश्लेषण से पता चला है कि लड़ाकू विमानों के अलावा अतिरिक्त उपकरणों की खरीद के लिए आवंटन में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल के 26,624 करोड़ रुपये से बढ़कर इस साल यह बढ़कर 36,223 करोड़ रुपये कर दिया गया है. सूत्रों ने बताया कि इस कैटगरी में दरअसल अन्य विशिष्ट तकनीकों के अलावा नई मिसाइलों और ड्रोन के अधिग्रहण का ख्याल भी रखा गया है.

मगर विमान और एयरो इंजन की खरीद के लिए आवंटित धन कम कर दिया गया है. चालू वित्त वर्ष के लिए यह राशि 18,966 करोड़ रुपये थी. वित्त मंत्री ने इसे नए वित्तीय वर्ष में घटाकर 15,721 करोड़ रुपये कर दिया है.

सूत्रों ने बताया कि साफ है कि फिलहाल IAF की 114 मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) को खरीदने की योजना पर नए वित्तीय वर्ष में अमल में लाने की संभावना नजर नहीं आ रही है क्योंकि अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए कुल लागत की 10 प्रतिशत राशि का अग्रिम भुगतान करने की जरूरत होगी.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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