1989 में मीनू मसानी ने लिखा था कि ज़मीनी स्तर पर सतर्क लोकतंत्र के सबसे बड़े दुश्मन व्यक्तित्व पूजा, पार्टी के ‘हाई कमांड’ के प्रति अंधी वफादारी, चापलूसी और ऐसी नियंत्रित अर्थव्यवस्था हैं, जहां आर्थिक रूप से टिके रहने के लिए परमिट-लाइसेंस ज़रूरी शर्त बन जाता है.