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Tuesday, 28 April, 2026
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ओडिशा के सिजिमाली में हिंसा की स्वतंत्र जांच हो, पेसा और वन कानून का पालन किया जाए: कांग्रेस

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नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने ओडिशा में बॉक्साइट खनन परियोजना के खिलाफ आदिवासियों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले को लेकर मंगलवार को कहा कि केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को सुनिश्चित करना चाहिए कि हालिया हिंसा की स्वतंत्र जांच हो और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) तथा वन अधिकार कानून का अक्षरशः पालन किया जाए।

ओडिशा के रायगढ़ा और कालाहांडी जिलों में स्थित सिजिमाली बॉक्साइट खदान परियोजना के खिलाफ स्थानीय आदिवासियों का विरोध पिछले कुछ वर्षों से जारी है और हाल के दिनों में यह तेज हो गया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हो गए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ओडिशा ऐसे हालात में आदिवासी और अन्य समुदायों के विरोध प्रदर्शनों के लिए कोई अनजान राज्य नहीं है, जब प्रमुख पारिस्थितिक प्रभाव वाली खनन परियोजनाओं को सभी कानूनी और संवैधानिक सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर लागू करने की कोशिश की जाती है। इस निराशाजनक क्रम की ताजा कड़ी रायगढ़ा और कालाहांडी जिलों की सिजिमाली बॉक्साइट खनन परियोजना है।”

उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पेसा, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 का गंभीर उल्लंघन हुआ है।

कांग्रेस नेता ने दावा, ‘‘संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित इन कानूनों के तहत प्रभावित व्यक्तियों, स्थानीय समुदायों और ग्राम सभाओं जैसी संस्थाओं को जो अधिकार दिए गए हैं, उन्हें कथित तौर पर जानबूझकर कमजोर किया गया है या नजरअंदाज किया गया है।’’

उन्होंने आरोप लगाया, “जब कुछ दिन पहले स्वाभाविक रूप से आंदोलन हुआ, तो पुलिस ने अनुसूचित जनजाति समुदायों, विशेषकर महिलाओं के खिलाफ लक्षित तरीके से असंगत बल का इस्तेमाल किया। इस प्रकार एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का उल्लंघन हुआ। यह उस राज्य में हुआ है, जहां मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी समुदाय से हैं।”

उन्होंने कहा, “केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम भी ओडिशा से हैं। उन्हें अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और सिजिमाली में हिंसा की स्वतंत्र जांच का आदेश देना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पेसा, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 को विश्वसनीय, पारदर्शी और भागीदारीपूर्ण तरीके से अक्षरशः लागू किया जाए।”

भाषा हक अविनाश खारी

खारी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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