नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राज्यसभा में ताकत बढ़कर 113 हो गई है, क्योंकि चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने वाले छह अन्य सांसदों के विलय को मंजूरी दे दी.
अपने दो-तिहाई सांसद खोना AAP के लिए बड़ा झटका रहा है, और अब राज्यसभा में उसकी संख्या घटकर तीन सदस्यों तक रह गई है.
तीन सांसद–राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल–ने शुक्रवार को AAP से अलग होकर बाद में पार्टी नेतृत्व की मौजूदगी में बीजेपी जॉइन कर ली.
हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल ने भी बीजेपी का रुख कर लिया.
इस बीच, AAP सांसद संजय सिंह ने आधिकारिक तौर पर राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन को सात सांसदों को अयोग्य घोषित करने के लिए याचिका दी.
इस याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 के तहत बताए गए “कथित विलय” को चुनौती दी गई और पैरा 2(1)(a) के तहत सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई.
दसवीं अनुसूची का पैरा 2 दल बदल के आधार पर अयोग्यता से जुड़ा है. इसके उप-पैरा (1) में कहा गया है कि पैरा 4 और 5 के प्रावधानों के अधीन, किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े सदस्य को सदन की सदस्यता से अयोग्य ठहराया जा सकता है. इस उप-पैरा के क्लॉज (a) में कहा गया है कि अगर कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है, तो उसे अयोग्य ठहराया जाएगा.
सिंह ने संविधान में दिए गए नियमों का हवाला देते हुए इस विलय की वैधता को चुनौती दी.
हालांकि, दसवीं अनुसूची के अनुसार, अगर कोई मूल राजनीतिक दल किसी दूसरे दल में विलय हो जाता है और इसमें दो-तिहाई सदस्य शामिल होते हैं, तो सांसदों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. सात AAP सांसदों ने बीजेपी के साथ मिलकर इस शर्त को पूरा किया.
इस फैसले से AAP नेताओं में गुस्सा फैल गया है, जिन्होंने इसे “विश्वासघात” कहा, जबकि बीजेपी ने इसका गर्मजोशी से स्वागत किया.
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