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Saturday, 25 April, 2026
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जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने भू धंसाव प्रभावित शहर के लिए वैज्ञानिक आधार पर योजनाएं बनाने की मांग की

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चमोली, 25 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड की जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने शनिवार को भू धंसाव प्रभावित कस्बे के लिए सभी राहत योजनाओं को राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययनों के आधार पर बनाने की मांग की।

समिति ने जोशीमठ में एक प्रेस संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य सरकार के जारी राहत कार्यक्रमों पर असंतोष व्यक्त किया।

सदस्यों ने 600 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के आधार पर सवाल उठाए।

समिति ने कुछ क्षेत्रों में काम शुरू किए जाने पर चिंता जताई जबकि अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों की कथित तौर पर उपेक्षा किये जाने का आरोप लगाया।

समिति ने जीर्णोद्धार के प्रारंभिक चरण के लिए कुछ विशेष स्थानों के चयन को लेकर स्पष्टीकरण की भी मांग की।

समिति के संयोजक अतुल सती ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “विष्णुप्रयाग, नरसिंह मंदिर रोड, सुनील और मारवाड़ी में जारी कार्यों का कोई स्पष्ट वैज्ञानिक आधार नहीं है।”

सती ने कहा कि सिंहधर, मनोहरबाग और रविग्राम सहित संवेदनशील क्षेत्रों को वर्तमान कार्यसूची से बाहर रखा गया है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सभी तकनीकी कार्यों के लिए वैज्ञानिक निष्कर्षों को ही एकमात्र आधार बनाया जाए।

समिति ने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों के लिए तत्काल राहत और स्थापित मानदंडों के आधार पर विस्थापित परिवारों को मुआवजा वितरित करने की मांग की।

समिति ने हल्के ढांचों के निर्माण की अनुमति देने के लिए आवास संबंधी प्रतिबंधों की समीक्षा करने का भी अनुरोध किया।

जनवरी 2023 में जोशीमठ में वृहद पैमाने पर भू धंसाव हुआ था, जिसके मद्देनजर समिति ने सुरक्षा और पुनर्वास के लिए निरंतर आंदोलन चलाया।

देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा किए गए व्यापक अध्ययनों के बाद केंद्र सरकार ने शहर को बचाने के लिए 1,650 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि स्वीकृत की।

भाषा जितेंद्र धीरज

धीरज

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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