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Wednesday, 22 April, 2026
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पंजाब के बेअदबी रोधी कानून के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर

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चंडीगढ़, 22 अप्रैल (भाषा) पंजाब सरकार द्वारा लाए गए ‘बेअदबी रोधी कानून’ को रद्द करने की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। इस कानून में गुरु ग्रंथ साहिब के खिलाफ किसी भी प्रकार की बेअदबी पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।

पंजाब के जालंधर जिले के रहने वाले सिमरनजीत सिंह द्वारा दायर इस याचिका पर अभी सुनवाई नहीं हुई है।

‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को 13 अप्रैल को विशेष सत्र के दौरान पंजाब विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने 17 अप्रैल को इस विधेयक को मंजूरी दी थी।

पंजाब सरकार ने सोमवार को इस बेअदबी रोधी कानून को अधिसूचित कर दिया।

याचिका में बेअदबी रोधी कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के आधारों में कहा गया है कि यह अधिनियम धारा 5(3) के तहत आजीवन कारावास जैसी आपराधिक सजा का प्रावधान करता है, जो समवर्ती सूची का विषय है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ये दंड प्रावधान मौजूदा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) से असंगत हैं, इसलिए इस अधिनियम को वैध होने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक थी।

राजपत्र के अनुसार, केवल राज्यपाल की मंजूरी ली गई है, जिससे पूरा अधिनियम प्रक्रियात्मक रूप से अवैध और असंवैधानिक हो जाता है।

याचिका में आगे कहा गया है कि यह कानून केवल ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब’ के ‘सरूपों’ (पवित्र स्वरूप) के लिए ही विशेष और कठोर दंडात्मक प्रावधान करता है।

याचिका में कहा गया, “अन्य धार्मिक ग्रंथों को बाहर रखकर राज्य ‘कानून के समक्ष समानता’ की कसौटी पर खरा नहीं उतरता और संविधान की मूल संरचना यानी धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन करता है।”

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि धारा 5(3) शांति भंग करने के इरादे से बेअदबी की साजिश रचने पर आजीवन कारावास का प्रावधान करती है।

याचिकाकर्ता ने कहा, “धार्मिक भावनाओं के खिलाफ किसी गैर-हिंसक अपराध को हत्या जैसी सजा के बराबर रखना अनुपातहीन है और अनुच्छेद 14 के तहत ‘स्पष्ट रूप से मनमाना’ है।”

यह कानून ‘बेअदबी’ की घटनाओं को रोकने और गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता बनाए रखने के लिए कड़ी सजा का प्रस्ताव करता है।

कानून के अनुसार, बेअदबी करने वाले व्यक्ति को न्यूनतम सात वर्ष से लेकर अधिकतम 20 वर्ष तक की सजा और दो लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

वहीं, यदि कोई व्यक्ति आपराधिक साजिश के तहत शांति या सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के इरादे से बेअदबी करता है, तो उसे न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और पांच लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

भाषा

राखी रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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