भुवनेश्वर, 21 अप्रैल (भाषा) बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद सस्मित पात्रा ने मंगलवार को भारत निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि मतदाताओं के नाम गहन, दस्तावेजी और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जमीनी जांच के बिना नहीं हटाए जाने चाहिए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में पात्रा ने कहा, ‘प्रशासनिक रूप से यह स्वीकार किया गया है कि प्रारंभिक सत्यापन चरण के दौरान संभावित रूप से सूची से हटाने के लिए लगभग 9.8 लाख मतदाताओं की पहचान की गई है… इन्हें हटाने का पैमाना, पद्धति और प्रक्रिया गंभीर और बुनियादी चिंताएं पैदा करती है।’
उन्होंने कहा, ‘अब कई स्वतंत्र रिपोर्ट के साथ-साथ ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से जुड़े बयानों से प्राप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं—जो प्रक्रियात्मक अनियमितताओं और गलत तरीके से मताधिकार से वंचित किए जाने के वास्तविक जोखिम का संकेत देते हैं।’
ओडिशा के सीईओ आर एस गोपालन ने सोमवार को कहा कि उनके कार्यालय को मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम हटाए जाने से संबंधित दो लाख से अधिक शिकायतें मिली हैं। उन्होंने सभी जिलों के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।
बीजद के सांसद ने पत्र में आग्रह किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी मतदाता का नाम तब तक न हटाया जाए, जब तक कि उसकी व्यापक जांच न हो जाए।
उन्होंने पत्र में कहा, ‘तैयारी के चरण में मतदाता सूची से हटाने के लिए चिह्नित सभी मामलों का राज्यव्यापी और व्यापक पुनः सत्यापन कराया जाए। साथ ही, प्रस्तावित नामों को हटाने से जुड़ा निर्वाचन क्षेत्र-वार और श्रेणी-वार डेटा सार्वजनिक रूप से जारी किया जाए और इसके कारण भी स्पष्ट किये जाएं, ताकि पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।’
इसी बीच, बीजद विधायक और पूर्व मंत्री रणेंद्र प्रताप स्वैन ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘9.8 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक साजिश है, जो पहले अन्य राज्यों में भी की जा चुकी है।’
भाषा
प्रचेता दिलीप
दिलीप
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