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Tuesday, 28 April, 2026
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बंधुआ मजदूरों की तस्करी: शीर्ष अदालत ने श्रम मंत्रालय से हलफनामा दाखिल करने को कहा

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नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव को मंगलवार को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें बंधुआ मजदूरों की अंतर-राज्यीय तस्करी के मुद्दे से निपटने के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा शामिल हो।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि हलफनामे में यह भी बताया जाना चाहिए कि इस मामले में शीर्ष अदालत से और क्या निर्देश अपेक्षित हैं।

पीठ उन लोगों के मौलिक अधिकारों को लागू करने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनकी तस्करी बंधुआ मजदूरों के तौर पर की जाती है।

अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी ने पीठ को बताया कि कई घटनाक्रम हुए हैं। उन्होंने कहा, “आप सचिव से हलफनामा दाखिल करने के लिए क्यों नहीं कहते?”

न्यायालय ने वेंकटरमानी से इस मामले में उसकी सहायता करने का अनुरोध किया था।

पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल ने उसके समक्ष एक नोट पेश किया है, जिसमें मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदमों और योजना की स्थिति के बारे में भी जानकारी दी गई है।

उसने कहा, “हमारा मानना ​​है कि श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव का हलफनामा दाखिल करना उचित होगा। हलफनामा तीन हफ्ते के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए।”

पीठ ने कहा, “हलफनामे में यह भी बताया जाएगा कि इस अदालत से आगे क्या निर्देश अपेक्षित हैं, ताकि अगली तारीख पर उचित आदेश पारित किए जा सकें।”

उसने मामले की अगली सुनवाई 19 मई को तय की।

मामले में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने कहा कि विभिन्न राज्यों से लगभग 11,000 बच्चों को बचाया गया है, लेकिन उनमें से केवल 971 को ही तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

नवंबर 2024 में शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि मंत्रालय के सचिव को सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के अपने समकक्षों के साथ बैठक बुलानी चाहिए, ताकि एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया जा सके, जो अंतर-राज्यीय तस्करी और रिहाई प्रमाण पत्र प्रदान करने से संबंधित मुद्दे का समाधान करे।

न्यायालय ने निर्देश दिया था कि प्रस्ताव में एक सरलीकृत प्रक्रिया भी शामिल होनी चाहिए, जिसके तहत बच्चों सहित बचाए गए बंधुआ मजदूरों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

उसने केंद्र सरकार को प्रक्रिया को अंतिम रूप देते समय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की भी राय लेने का निर्देश दिया था।

भाषा पारुल रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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