(शिवमोगा/बेंगलुरु) (कर्नाटक), 21 अप्रैल (भाषा) पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा पर्यटकों पर गोलीबारी की घटना के एक साल बाद मंजुनाथ राव के परिवार का कहना है कि जीवन में आगे बढ़ने की कोशिश के बावजूद, उस घटना का दर्द उनके मन में आज भी ताजा है। उनके चचेरे भाई रवि किरण ने यह बात कही।
बाईस अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए 26 पर्यटकों में दो कर्नाटक के नागरिक भी शामिल थे, और उनके परिवारों के लिए उस घटना की खौफनाक यादें आज भी ताजा हैं।
शिवमोगा के रहने वाले 47 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी मंजुनाथ राव भी पीड़ितों में से एक थे। उनकी पत्नी पल्लवी और बेटे के सामने ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, राव अपनी पत्नी और बेटे के साथ कश्मीर की अपनी पहली यात्रा के तहत पहलगाम गए थे और उन्हें 24 अप्रैल को वापस लौटना था।
किरण ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, ‘‘वे कुछ भी नहीं भूल सकते। यह उनके मन में बसा हुआ है। लेकिन जिंदगी तो चलती रहती है… उनके पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है कि वे इस दर्द को सह लें। उनकी पत्नी इस बारे में बात करने को तैयार नहीं हैं…… कहने के लिए क्या बचा है? जिंदगी तो चलती ही रहती है।’’
दूसरे पीड़ित बेंगलुरु के रहने वाले 41 वर्षीय आईटी पेशेवर भरत भूषण हैं, जो अपनी पत्नी और तीन वर्षीय बेटे के साथ पहलगाम गए थे।
भूषण की आतंकवादियों ने उनकी पत्नी सुजाता और बेटे के सामने गोली मारकर हत्या कर दी। सुजाता इस हमले में बाल-बाल बच गईं।
उनके परिवार के अनुसार, सुजाता को जब पता चला कि उनके पति की मृत्यु हो गई है, तो उन्होंने उनके पहचान पत्र उठाए और अपने बेटे के साथ घटनास्थल से भाग गईं।
‘पीटीआई-भाषा’ ने बेंगलुरु के मट्टीकेरे स्थित भूषण के घर जाकर उनसे बात की, तो उनके पिता वी चेन्नावीरप्पा ने घटना के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। पहलगाम आतंकी हमला ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का आधार बना।
भाषा संतोष दिलीप
दिलीप
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