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Friday, 17 April, 2026
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अफगानिस्तान के डोपिंग प्रयासों पर ‘राजनीति और उदासीनता’ का साया

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(पूनम मेहरा)

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) अफगानिस्तान का डोपिंगरोधी कार्यक्रम उसके खेल की तरह ही तालिबान सरकार के दौरान बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और इसकी बानगी यह है कि तीन साल एक भी परीक्षण नहीं हुआ और पिछले साल केवल चार परीक्षण ही किए जा सके।

आलम यह है कि अफगानिस्तान के डोपिंग रोधी कार्यक्रम के निर्वासित अध्यक्ष डॉ. अब्दुल रहमान हमीद यह स्वीकार करने में संकोच नहीं करते कि फिलहाल ‘कोई उम्मीद नहीं है’।

खेल से जुड़ी चोटों के विशेषज्ञ हमीद अफगानिस्तान की डोपिंग रोधी समिति के अध्यक्ष थे जो अफगानिस्तान की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (एनओसी) के अंतर्गत काम करती है।

हमीद ने पीटीआई से कहा, ‘‘हमें एक ऐसी डोपिंग रोधी एजेंसी की जरूरत है जो स्वायत्त रूप से कार्य कर सके, क्योंकि एनओसी के तहत काम करने से हमारे पास कार्यक्षेत्र को व्यापक बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होंगे। वर्तमान में अफगानिस्तान में डोपिंग नियंत्रण अधिकारी (डीसीओ) भी नहीं हैं जो नमूना संग्रह करने जैसे बुनियादी काम भी कर सके।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पहले दो डीसीओ थे। दोनों विश्वविद्यालय के लेक्चरर थे, लेकिन उन्हें भागना पड़ा। अब कोई डीसीओ नहीं है।’’

डोपिंग रोधी अभियानों में डीसीओ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी जिम्मेदारियों में न केवल नमूनों का संग्रह (प्रतियोगिता के दौरान और उसके बाहर दोनों जगह) शामिल है, बल्कि उन्हें विश्व डोपिंग रोधी संस्था (वाडा) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं तक सुरक्षित रूप से पहुंचाना भी शामिल है।

हमीद ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान में 2021 से कोई परीक्षण नहीं हो रहे थे। हमने ईरान की मदद से पिछले साल चार परीक्षण किए। लेकिन अब कोई उम्मीद नहीं है। यह बेहद मुश्किल है। अफगानिस्तान में लोगों को डोपिंग रोधी अभियान का कोई अनुभव नहीं है।’’

भाषा

पंत मोना

मोना

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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