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Tuesday, 14 April, 2026
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मुख्यमंत्री स्टालिन और रेवंत रेड्डी ने परिसीमन को लेकर केंद्र पर हमला तेज किया, आंदोलन की चेतावनी दी

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(तस्वीरों के साथ)

चेन्नई/ हैदराबाद, 14 अप्रैल (भाषा) दक्षिण के दो प्रमुख गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों एम.के. स्टालिन और ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए चेतावनी दी कि अगर उनके राज्यों को नुकसान हुआ तो ‘बड़ा आंदोलन’ खड़ा किया जाएगा।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने राज्य को नुकसान पहुंचने की स्थिति में ‘‘बड़े पैमाने पर आंदोलन’’ की चेतावनी दी, जबकि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेड्डी ने ‘अन्याय’ का मुद्दा उठाया।

स्टालिन और रेड्डी की तीखी टिप्पणियां संसद के बजट सत्र के तीन दिवसीय विस्तारित बैठक के दो दिन पहले आईं। संसद की इस सप्ताह होने वाली बैठक के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन पेश किए जाएंगे, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है, और इसे 2029 में लागू किया जाएगा।

स्टालिन ने एक वीडियो संदेश में चेतावनी दी कि अगर राज्य को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम उठाया गया या परिसीमन में उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति में असमान रूप से वृद्धि की गई, तो तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आंदोलन होंगे जिससे पूरा राज्य ठप्प हो जाएगा और ‘पूरी ताकत से विरोध प्रदर्शन’ होंगे।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर गोपनीयता बरतने के आरोप को दोहराते हुए कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ही नहीं बल्कि किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी राज्य से परामर्श किए बिना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के नेतृत्व वाला केंद्र एकतरफा कार्रवाई करने का प्रयास कर रहा है।

सत्तारूढ़ द्रमुक अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हमें यह भी नहीं पता कि परिसीमन की यह प्रक्रिया कैसे संपन्न होगी। प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन के संबंध में अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।’’

स्टालिन ने कहा कि जब प्रक्रिया में गोपनीयता बरती जाती है, तो इससे गंभीर खतरे की आशंका और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों के लोग गहरी चिंता में डूबे हुए हैं।

द्रमुक नेता ने 16 अप्रैल को संसद के सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावों के बीच इसे ‘‘जबरन बुलाया गया’’ है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इस सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन को जबरदस्ती पारित कराने का इरादा रखती है।’’ उनका दावा है कि केंद्र सरकार तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों पर अपना फैसला थोपना चाहती है।

स्टालिन ने कहा कि परिसीमन को जल्दबाजी में लागू करने का यह प्रयास भाजपा सरकार द्वारा लोकतंत्र पर एक स्पष्ट हमला है। इससे भी बढ़कर, यह राज्यों के अधिकारों पर सीधा हमला है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि ऐसा कुछ भी किया जाता है जिससे तमिलनाडु को नुकसान पहुंचता है, या जिससे उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति में अनुचित रूप से वृद्धि होती है, तो हम तमिलनाडु में चुप नहीं रहेंगे।’’

स्टालिन ने वीडियो संदेश में कहा, ‘‘तमिलनाडु पूरी ताकत से अपना विरोध दर्ज कराएगा। हर परिवार सड़कों पर उतरेगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में मेरे नेतृत्व में, हम एक व्यापक आंदोलन खड़ा करेंगे।’’

द्रमुक अध्यक्ष ने केंद्र को आगाह करते हुए कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि चूंकि यह चुनाव का समय है और ‘‘लोगों का ध्यान कहीं और है, इसलिए आप चुपचाप दिल्ली में परिसीमन करा सकते हैं। ऐसा सोचना भी मत।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप यह सोचते हैं कि आप तमिलनाडु के साथ अन्याय करके हमेशा की तरह आगे बढ़ सकते हैं, तो आप गलतफहमी में हैं। संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. बी. आर. आंबेडकर की जयंती पर मैं यह बात अत्यंत गंभीरता से कह रहा हूं।’’

स्टालिन ने कहा, ‘‘अगर तमिलनाडु प्रभावित हुआ, तो हम पूरे देश का ध्यान इस ओर दिलाएंगे। प्रधानमंत्री जी, मैं दोहराता हूं, तमिलनाडु की ओर से आपको यह अंतिम चेतावनी है। तमिलनाडु लड़ेगा, तमिलनाडु जीतेगा।’’

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में परिसीमन को लेकर केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए आरोप लगाया है कि यदि पर्याप्त संख्या में सीट नहीं बढ़ाई जाती, तो दक्षिणी राज्यों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को ‘अन्याय’ का सामना करना पड़ेगा।

रेड्डी ने डॉ. आंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने परिसीमन का मुद्दा इसलिए उठाया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी कथित तौर पर दक्षिणी राज्यों की कीमत पर उत्तर प्रदेश या गुजरात में सीट की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वे इस बात से इनकार नहीं करते कि यदि सीट में आनुपातिक आधार पर वृद्धि की जाती है तो उत्तरी राज्यों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व को लाभ होगा।

रेड्डी ने कहा कि यदि लोकसभा की कुल सीट की संख्या में आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाती है, तो केरल में लोकसभा की सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी और उत्तर प्रदेश में 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘यदि किसी उत्तरी राज्य में 30 सीट बढ़ जाती हैं, तो वहां दलितों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण बढ़ सकता है। मैं इससे इनकार नहीं करता। लेकिन क्या दक्षिणी राज्यों में सीट कम होने से दलितों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं को नुकसान नहीं होगा?’’

रेड्डी ने तेलंगाना और अन्य राज्यों में निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढ़ाने के लिए संघर्ष करने की वकालत की।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करने के लिए प्रस्तावित विधेयक पर कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है और उनकी सरकार विधानसभा में महिलाओं के कोटे पर कानून पारित करने के लिए तैयार होगी।

रेड्डी ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि आनुपातिक फार्मूले के आधार पर परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के साथ ‘अन्याय’ होगा। उन्होंने राजनीतिक दलों और अन्य लोगों के साथ व्यापक चर्चा के आधार पर आम सहमति बनाने की प्रक्रिया का आह्वान किया।

भाषा धीरज नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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