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Tuesday, 14 April, 2026
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केंद्र सरकार का लोकसभा सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने का प्लान

विपक्षी दलों ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि इससे लोकसभा में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है.

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नई दिल्ली: सरकार ने 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करने के इरादे के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और बाकी 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित हैं, सूत्रों के अनुसार.

अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं. सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में 2029 से लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल लाने की योजना बना रही है.

बजट सत्र की विशेष बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा होगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से प्रस्तावित संशोधन बिल का समर्थन करने की अपील की है और भरोसा जताया है कि 2029 तक महिलाओं को विधायी संस्थाओं में ज्यादा मजबूत प्रतिनिधित्व और अधिकार मिलेंगे.

“चार दशकों के इंतजार के बाद संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया. इससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिला है. सभी पार्टियों ने इस महत्वपूर्ण कानून का समर्थन किया. महिलाओं को जो अधिकार मिले हैं, उनके लागू होने में देरी नहीं होनी चाहिए. इसे अभी लागू किया जाना चाहिए. 2029 में लोकसभा चुनाव होंगे, उसके बाद राज्य विधानसभा चुनाव चलेंगे. इसे 2029 से पहले लागू किया जाना चाहिए. यह देश की भावना है. यह नारी शक्ति की इच्छा है,” उन्होंने देहरादून में एक कार्यक्रम में कहा.

“सभी राजनीतिक दल एक साथ आएं और देश की बहनों और बेटियों के अधिकार से जुड़े इस काम को सर्वसम्मति से आगे बढ़ाएं,” पीएम मोदी ने कहा.

विपक्षी दलों ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि इससे लोकसभा में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है. विपक्षी दलों ने यह भी कहा कि सरकार जनगणना से पहले इस बिल को जल्दबाजी में ला रही है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों से सही तरीके से सलाह किए बिना संविधान संशोधन को जबरन पास करना चाहती है.

उन्होंने कहा कि अगर राज्य के हितों को नुकसान हुआ या दक्षिणी राज्यों के साथ असमान व्यवहार हुआ, तो तमिलनाडु में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.


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