नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार की अक्षमता के कारण उस पाकिस्तान को पश्चिम एशिया संकट के समाधान की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर मिला जो पहले विश्व मंच पर अलग-थलग पड़ा हुआ था।
कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में पश्चिम एशिया के मामले पर पारित प्रस्ताव में सरकार से यह आग्रह भी किया गया कि वह विपक्षी दलों को विश्वास में ले और एकीकृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाए, ताकि भारत को उसकी ऐतिहासिक भूमिका में फिर से स्थापित किया जा सके।
प्रस्ताव में कहा गया है, ‘कांग्रेस पश्चिम एशिया में युद्धविराम का स्वागत करती है, इसे तनाव कम करने, कूटनीतिक भूमिका निभाने, रचनात्मक संवाद और स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है। राष्ट्रध्यक्षों की हत्या, अंतरराष्ट्रीय कानून से परे युद्ध छेड़ना, और नागरिकों तथा नागरिक अवसंरचना पर हमले, मानवता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था दोनों के खिलाफ घृणित अपराध हैं।’
कांग्रेस ने कहा कि कोई भी सार्थक समाधान जिनेवा संधि और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।
उसने कहा कि 1947 से अब तक की सरकारों ने वैश्विक सिद्धांतों का पालन किया है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’, महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति पर आधारित विदेश नीति की परिपाटी से प्रेरित है।
प्रस्ताव में अतीत के कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा गया है, ‘हाल के समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर हुई है, हमारे पड़ोस में संबंधों पर असर पड़ा है, हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता के तौर पर हमारी भूमिका क्षीण हुई है और वैश्विक दक्षिण में हमारी नैतिक नेतृत्व क्षमता कमजोर हुई है।’
कांग्रेस ने कहा कि युद्ध के ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इज़राइल दौरा यह संदेश देता है कि भाजपा सरकार सैन्य तनाव को बढ़ावा देने और चुनावों से पहले दक्षिणपंथी सरकार का राजनीतिक समर्थन कर रही है।
उसने इस बात पर जोर दिया कि कूटनीति और चुनावी राजनीति को मिलाना ख़तरनाक है। उसने दावा किया कि भाजपा की अदूरदर्शिता, विभाजनकारी और अनैतिक विदेश नीति ने भारत को पड़ोसियों से दूर कर दिया है और पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग रखने की दशकों की मेहनत से बनाई गई रणनीति को कमजोर कर दिया है।
मुख्य विपक्षी दल के प्रस्ताव में कहा गया, ‘भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक दायरे को छोड़ने से पाकिस्तान को अपनी वैश्विक छवि सुधारने तथा भारत, अफगानिस्तान और ईरान में सीमा पार आतंकवाद के अपने इतिहास पर पर्दा डालने का अवसर मिला है।’
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार की अक्षमता ने पाकिस्तान को एशिया में महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा में एक निर्णायक भूमिका का दावा करने का अवसर दे दिया है। पार्टी ने भारत-पाकिस्तान मामलों के अंतरराष्ट्रीयकरण होने की आशंका भी जतायी।
उसने कहा, ‘हम जिस अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं, उसे देखते हुए, भाजपा सरकार को राष्ट्रीय हित को चुनावी और वैचारिक एजेंडों के अधीन करना और भारत की विदेश नीति से जुड़े लोगों की सलाह की अनदेखी करना बंद करना चाहिए।’’
पार्टी ने कहा, ‘‘ इसके बजाय, सरकार को विपक्ष को विश्वास में लेकर, तत्काल नीति में बदलाव करते हुए एक एकीकृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि भारत को शांति और न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक सैद्धांतिक, सक्रिय और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में उसकी ऐतिहासिक भूमिका में फिर से स्थापित किया जा सके।’
भाषा हक माधव अविनाश
अविनाश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
