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Friday, 10 April, 2026
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एलपीजी समस्या, बारिश के कारण मार्च-अप्रैल में चीनी की मांग चार लाख टन कम होने का अनुमान: इस्मा

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नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) उद्योग संगठन इस्मा ने मंगलवार को कहा कि वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति में कमी और देश के कुछ हिस्सों में बारिश के कारण मार्च-अप्रैल के दौरान देश में चीनी की मांग चार लाख टन कम रहने का अनुमान है।

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) के महानिदेशक दीपक बलानी ने कहा कि विपणन वर्ष 2025-26 के (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी की कुल घरेलू मांग 281 लाख टन रहने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि इस विपणन वर्ष के पहले पांच महीनों में कुल मांग 2024-25 की इसी अवधि की तुलना में 60,000 टन अधिक थी।

बलानी ने कहा, ‘‘पिछले महीने मिलों से चीनी की आपूर्ति लगभग दो लाख टन कम हो गई, जिसका मुख्य कारण वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति में आई दिक्कतें थीं।’’

उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में बारिश और एलपीजी की समस्या के कारण इस महीने भी चीनी की मांग दो लाख टन कम होने का अनुमान है।

गर्मियों में पेय पदार्थों की खपत बढ़ने के कारण चीनी की मांग बढ़ जाती है। संस्थागत उपभोक्ता (जैसे पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियां और मिठाई की दुकानें) देश में चीनी की कुल घरेलू मांग का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरा करते हैं।

बलानी ने कहा कि इस विपणन वर्ष में कुल मांग अनुमानित 281 लाख टन से घटकर कम से कम 277 लाख टन रहने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप सितंबर के अंत में चीनी का शेष बचा स्टॉक बढ़ जाएगा।

निर्यात के बारे में बलानी ने कहा कि देश विपणन वर्ष 2025-26 में 7.5 से आठ लाख टन चीनी का निर्यात कर सकता है। यह खाद्य मंत्रालय द्वारा अनुमति दी गई लगभग 16 लाख टन की मात्रा से कम है।

उत्पादन के संबंध में उन्होंने कहा कि एथनॉल बनाने के लिए 35 लाख टन चीनी के अलग करने के बाद कुल उत्पादन लगभग 285 लाख टन रहने का अनुमान है।

इस्मा लगातार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में वृद्धि और पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाने की मांग कर रहा है।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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