नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने कहा है कि भुवनेश्वर में रेल डिब्बों की मरम्मत से संबंधित कार्यशाला ने डिब्बों के आवश्यक हिस्सों को बदलने के लिए पुरानी वस्तुओं का इस्तेमाल किया, जिससे न केवल तय मानदंडों का उल्लंघन हुआ, बल्कि यात्री सुरक्षा को भी खतरे में डाला गया।
समिति का कहना है कि इन गलतियों के बारे में उस वक्त पता चला जब कार्यशाला में मरम्मत के 100 दिनों के भीतर कई डिब्बों में खराबी आ गई।
पीएसी ने कार्यशाला के कामकाज, संयंत्र और मशीनरी की खरीद प्रक्रिया के साथ-साथ ‘कोच होल्डिंग डेटा’ के रखरखाव में कई विसंगतियां पाईं।
समिति ने रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है कि रेल डिब्बों की मरम्मत के लिए नवंबर, 1981 में मंचेश्वर (भुवनेश्वर) में कार्यशाला को स्थापित किया गया था जिसकी शुरुआती क्षमता 45 डिब्बे प्रति माह थी, जिसे 2016 तक बढ़ाकर 150 डिब्बे प्रति माह कर दिया गया।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मार्च 2023 में समाप्त हुए वर्ष के लिए कार्यशाला के कामकाज की जांच की थी और पीएसी ने विस्तृत जांच-पड़ताल के लिए कैग रिपोर्ट का सहारा लिया।
समिति ने पाया कि वर्ष 2020 से 2023 की समीक्षा अवधि के दौरान प्रारंभिक अनुमान 4,370 डिब्बों की मरम्मत का था और रेलवे बोर्ड द्वारा लक्ष्य को घटाकर 3,796 डिब्बे करने के बावजूद इसका परिणाम 3,402 डिब्बों का था।
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हक अविनाश
अविनाश
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