कानपुर, एक अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के कानपुर में गैर-कानूनी तरीके से गुर्दा प्रतिरोपण करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी और मामले में चार प्रमुख आरोपी चिकित्सकों के खिलाफ ‘लुकआउट नोटिस’ जारी किए। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि फरार चिकित्सकों रोहित उर्फ राहुल, अनुराग उर्फ अमित, अफजल और वैभव को पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि ये सभी गिरोह के प्रमुख सदस्य हैं और इनके देश से बाहर भागने की आशंका के मद्देनजर लुकआउट नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
अधिकारी ने बताया कि जांच अब गिरोह के नेटवर्क, उसके काम करने के तरीके और धन के लेन-देन पर केंद्रित है।
उन्होंने बताया कि साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गुर्दा देने वाले लोगों और प्रतिरोपण कराने वाले लोगों के बीच संपर्क कैसे स्थापित किया गया तथा उन्हें इसके लिए कैसे राजी किया गया।
पुलिस के अनुसार, बिहार के बेगूसराय जिले के एक संदिग्ध गुर्दा दाता आयुष को आईसीयू में होश आने के बाद उसका बयान दर्ज किया गया।
आयुष ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उसने अपनी जमीन गिरवी रख दी थी और दिल्ली के एक व्यक्ति ने टेलीग्राम के जरिए उसे फंसाया तथा बाद में उसकी मुलाकात आरोपी चिकित्सकों से कराई गई।
पीड़ित ने बताया कि शुरू में उसे गुर्दा दान करने के लिए नौ लाख रुपये देने का वादा किया गया था, जिसे बाद में घटाकर छह लाख रुपये कर दिया गया लेकिन अंततः उसे केवल साढ़े तीन लाख रुपये ही मिले, जिसको लेकर गिरोह के सदस्यों के बीच विवाद भी हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि अनुराग, अफजल व वैभव मेरठ के एक अस्पताल से जुड़े थे जबकि रोहित कथित रूप से गिरोह का सरगना था और अपनी टीम के साथ प्रतिरोपण की पूरी प्रक्रिया अंजाम देता था।
वह दवाइयां और उपकरण अपने साथ लाता था।
पुलिस के मुताबिक, सर्जरी से पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते थे, अस्पताल कर्मियों को छुट्टी पर भेज दिया जाता था और गुर्दा दान करने वाला तथा प्राप्तकर्ता को अलग-अलग स्थानों पर रखा जाता था, जिससे यह एक संगठित गतिविधि प्रतीत होती है।
पुलिस ने बताया कि अब तक कानपुर के एक अस्पताल में ऐसे आठ प्रतिरोपण की पुष्टि हुई है जबकि साक्ष्य 40 से 50 मामलों की ओर इशारा करते हैं।
पुलिस के मुताबिक, जांच का दायरा कई शहरों तक बढ़ा दिया गया और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गई हैं।
भाषा सं सलीम जितेंद्र
जितेंद्र
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