पणजी, 31 मार्च (भाषा) नौसेना उप-प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने मंगलवार को कहा कि हाल के वैश्विक घटनाक्रम एक मजबूत नौसेना की आवश्यकता को फिर से रेखांकित करते हैं और बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा व संघर्षों के बीच भारतीय नौसेना देश की समुद्री शक्ति का प्रमुख प्रतीक बनी हुई है।
वह वास्को में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित पहले अगली पीढ़ी के तटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) के जलावतरण के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
वाइस एडमिरल सोबती ने कहा, “भारत की भौगोलिक स्थिति और इतिहास से समुद्री राष्ट्र के रूप में उसकी पहचान निर्धारित होती है। विशाल तटरेखा, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में फैले कई भू-भागों व विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के साथ हमारा समुद्री क्षेत्र जिम्मेदारी और अवसर दोनों का स्रोत है।”
उन्होंने बताया कि हमारे आसपास के समुद्र व्यापार, ऊर्जा और संपर्क का जीवनाधार हैं।
उन्होंने कहा, “इन हितों की सुरक्षा के लिए एक सक्षम, त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली और दूरदर्शी नौसेना की आवश्यकता है। भारतीय नौसेना की भूमिका हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे के भू-राजनीतिक वातावरण को आकार देने में लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।”
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच उन्होंने कहा कि हाल के वैश्विक घटनाक्रम एक मजबूत नौसेना की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित करते हैं।
उन्होंने कहा, “बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और संघर्षों के बीच भारतीय नौसेना भारत की समुद्री शक्ति का प्रमुख प्रतीक बनी हुई है और कूटनीति व क्षेत्रीय स्थिरता का एक महत्वपूर्ण साधन है।”
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश
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