पिथौरागढ़, 20 मार्च (भाषा) उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत-चीन सीमा व्यापार छह साल के अंतराल के बाद इस वर्ष फिर से शुरू किया जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगाई ने बताया कि केंद्र सरकार से निर्देश मिलने के बाद जून से सितंबर तक संचालित होने वाले व्यापार सत्र की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय द्वारा इस संबंध में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी किए जाने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
जिलाधिकारी के अनुसार, भारत सरकार के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को पत्र लिखकर लिपुलेख दर्रे से चीन के साथ सीमा व्यापार बहाल करने का अनुरोध किया है। इस पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से भी एनओसी दिए जाने का उल्लेख किया गया है।
भटगाई ने बताया कि राज्य सरकार से संबंधित विभागों और एजेंसियों को निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है ताकि वर्ष 2026 के व्यापार सत्र के अनुसार सीमा व्यापार की बहाली सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, स्थानीय अधिकारियों के संपर्क विवरण चीन के साथ साझा करने की बात भी कही गई है, जिससे दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि व्यापार सत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए ‘ट्रेड पास’ जारी करने वाले अधिकारियों, मुद्रा विनिमय के लिए नामित बैंकों, सीमा शुल्क विभाग तथा धारचूला प्रशासन को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें व्यापारियों के लिए मार्ग में पड़ने वाले शिविर, संचार, बैंकिंग, सुरक्षा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
गौरतलब है कि लिपुलेख दर्रे के माध्यम से चीन (तिब्बत) के साथ सीमा व्यापार लंबे समय तक बंद रहने के बाद 1992 में पुनः शुरू हुआ था, लेकिन 2019 में कोविड-19 महामारी के दौरान इसे रोक दिया गया था। तब से व्यापारी इसके पुनः संचालन की प्रतीक्षा कर रहे थे।
सीमांत व्यापार संगठन, पिथौरागढ़ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकली ने व्यापार बहाली की खबर पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे व्यापारियों को 2019 से तिब्बत के तकलाकोट स्थित भंडारगृहों में रखा अपना सामान वापस लाने में भी मदद मिलेगी।
भाषा
सं, दीप्ति रवि कांत
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