(आसिम कमाल)
नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार, राज्य को विदेश से आने वाले पैसे, लॉटरी और शराब पर निर्भर बनाए हुए है, और यह मॉडल अब काम नहीं करेगा।
उन्होंने संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) का समर्थन करते हुए यह बात कही, जो पिछले एक दशक से सत्ता से बाहर है।
थरूर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि आगामी चुनाव के लिए कांग्रेस-नीत यूडीएफ का एजेंडा सिर्फ एलडीएफ के 10 साल के शासन के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं ज्यादा सकारात्मक है।
उन्होंने एलडीएफ सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार सितंबर तक पैसे खत्म कर देती है और फिर उधार लेकर भुगतान करना पड़ता है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस का मुख्य मुद्दा पिनराई विजयन सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर होगा, तो थरूर ने कहा, “नहीं, हमारा एजेंडा इससे कहीं ज्यादा सकारात्मक है। यह ‘केरल 2.0’ का मुद्दा है।”
उन्होंने कहा, “हां, सत्ता विरोधी लहर एक पहलू है। हमारे प्रमुख चुनावी नारों में से एक है कि सरकार ने जो गलत किया है, उसका हिसाब देने का समय आ गया है। लेकिन इसके साथ ही एक बहुत सकारात्मक संदेश भी है। उदाहरण के लिए, हमने महिलाओं के लिए बसों में मुफ्त यात्रा से लेकर बेहतर पेंशन भुगतान तक पांच ठोस गारंटी देने की बात कही है, जिसे वाम मोर्चा सरकार पूरा करने में लगातार विफल रही है।”
केरल की 149 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव नौ अप्रैल को होंगे।
तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि पार्टी का घोषणापत्र अभी आना बाकी है, लेकिन पार्टी राज्य में व्यापार के लिए माहौल बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।
उन्होंने कहा, “केरल विदेशों से आने वाले धन, लॉटरी और शराब पर निर्भर नहीं रह सकता, जो अभी तक राज्य को चला रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “क्या आपको पता है कि हम विकास परियोजनाओं पर जितना खर्च करते हैं, उससे ज्यादा कर्ज चुकाने, ब्याज, वेतन और पेंशन पर खर्च करते हैं। यह शर्मनाक है।”
उन्होंने वाम सरकार के राजस्व मॉडल की आलोचना की।
थरूर ने कहा कि इस तरह का मॉडल अब नहीं चल सकता, जिम्मेदारीपूर्वक प्रबंधन की जरूरत है, लेकिन यह अपने ही लोगों पर ज्यादा कर लगाकर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि केरल में पहले ही संपत्ति कर, स्टांप ड्यूटी और अन्य राज्य कर सबसे ज्यादा हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अब नए व्यवसायों और नए उद्यमों से राजस्व अर्जित करने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा राज्य में एक मामूली पक्ष ही बनी रहेगी और मुकाबला मुख्य रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच होगा।
उन्होंने कहा, “यह त्रिकोणीय मुकाबला नहीं है, क्योंकि भाजपा का विधानसभा में कोई सदस्य नहीं है। अगर वे शून्य से बढ़कर एक-दो या तीन सीट भी जीत लेते हैं, तो वे इसे बड़ी जीत मानेंगे।”
साल 2021 के चुनाव में एलडीएफ ने 99 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी, जो पिछली बार से आठ सीट ज्यादा थीं। यह 1977 के बाद पहली बार था जब किसी गठबंधन ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की।
यूडीएफ ने 41 सीट जीती थीं, जो पहले से छह कम थीं, हालांकि उनका मत प्रतिशत बढ़ा था, जबकि भाजपा को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश
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