scorecardresearch
Saturday, 25 April, 2026
होमदेशछत्तीसगढ़ सरकार ने ज़बरदस्ती धर्मांतरण रोकने के लिए विधानसभा में 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक' पेश किया

छत्तीसगढ़ सरकार ने ज़बरदस्ती धर्मांतरण रोकने के लिए विधानसभा में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक’ पेश किया

Text Size:

रायपुर, 19 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्य विधानसभा में एक विधेयक पेश किया, जिसका मकसद ज़बरदस्ती, लालच, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है।

उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सदन में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पेश किया। शर्मा के पास गृह विभाग का प्रभार भी है।

इस विधेयक पर चर्चा बाद में होगी।

इस विधेयक में ज़बरदस्ती, लालच, अनुचित प्रभाव या गलत जानकारी के ज़रिए धर्मांतरण को प्रभावी ढंग से रोकने के प्रावधान हैं।

इस विधेयक को पिछले सप्ताह मंत्रिपरिषद की बैठक में मंज़ूरी दी गई थी। मंत्रिपरिषद से मंज़ूरी मिलने के बाद संवाददाताओं से शर्मा ने कहा था कि यह विधेयक 1968 से चले आ रहे प्रावधानों का विस्तार करता है, जिसमें लालच के नए तरीकों को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि लालच में डिजिटल और आर्थिक तरीके भी शामिल हैं, जबकि धमकियां शारीरिक या अप्रत्यक्ष भी हो सकती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि एक व्यवस्थित कानूनी ढांचा तैयार किया गया है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि नागरिकों की संवैधानिक स्वतंत्रता पर कोई असर न पड़े, और साथ ही ऐसी स्थितियों को रोका जा सके जिनसे सामाजिक वैमनस्य पैदा हो सकता है।

फिलहाल, राज्य में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968’ लागू है। इसे मध्य प्रदेश से अलग होकर वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के अस्तित्व में आने के बाद वहां से (मध्य प्रदेश से) अपनाया गया था।

भाषा संजीव मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments