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Wednesday, 15 April, 2026
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भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति 2025 में लगातार बिगड़ती रही: यूएससीआईआरएफ

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न्यूयॉर्क, 16 मार्च (भाषा) अमेरिका सरकार के एक आयोग ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को कथित तौर पर खराब बताते हुए इसे ‘‘विशेष चिंता वाले देश’’ के रूप में नामित करने को कहा है।

अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) की रिपोर्ट पर भारत की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई है।

पिछले कुछ वर्षों में, भारत यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को ‘‘पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित’’ कहकर खारिज करता रहा है।

यूएससीआईआरएफ ने यह भी कहा कि ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (रॉ) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) जैसे संगठनों पर ‘‘उन व्यक्तियों या संस्थाओं की संपत्तियों को जब्त करके और/या अमेरिका में उनके प्रवेश पर रोक लगाकर धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन की जिम्मेदारी के लिए’’ लक्षित प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए।

इसने अमेरिका सरकार को सिफारिश की कि भारत को ‘‘व्यवस्थित, जारी और गंभीर धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन में शामिल होने और सहन करने’’ के लिए ‘‘विशेष चिंता वाले देश’’ के रूप में नामित किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 में, भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार बिगड़ती रही, क्योंकि सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों और उनके पूजा स्थलों को लक्षित करने वाले नए कानून पेश किए और लागू किए।

इसमें कहा गया, ‘‘कई राज्यों ने जेल की सख्ता सजा लाने के लिए धर्मांतरण-रोधी कानूनों को लागू करने या मजबूत करने के प्रयास किए। भारतीय अधिकारियों ने नागरिकों और धार्मिक शरणार्थियों की व्यापक हिरासत और अवैध निष्कासन की भी सुविधा प्रदान की तथा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हमलों को सहन किया।’’

रिपोर्ट में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी जिक्र किया गया है। हमले पर रिपोर्ट में कहा गया कि ‘‘तीन बंदूकधारियों ने कश्मीर के मुस्लिम-बहुल क्षेत्र में मुख्य रूप से हिंदू पर्यटकों’’ के एक समूह पर हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए।

इसमें कहा गया, ‘‘ऐसा कहा जाता है कि हमलावरों ने लोगों से ‘कलमा’ पढ़ने को कहा, और जो ऐसा नहीं कर पाए, उन्हें मार डाला गया। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पांच दिन तक संघर्ष चला और लक्षित हमलों सहित भारत में मुस्लिम-विरोधी भावना तीव्र हो गई।’’

रिपोर्ट में कहा गया कि भविष्य में अमेरिकी सुरक्षा सहायता और भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार से जोड़ा जाना चाहिए।

यूएससीआईआरएफ ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस को ‘‘अमेरिका में धार्मिक अल्पसंख्यकों को लक्षित करने वाले भारत सरकार के अंतरराष्ट्रीय दमन कृत्यों की वार्षिक रिपोर्टिंग की आवश्यकता के लिए’’ ‘ट्रांसनेशनल रिप्रेशन रिपोर्टिंग एक्ट 2024’ को फिर से लागू और पारित करना चाहिए।

यूएससीआईआरएफ के अध्यक्ष विक्की हार्ट्ज़लर ने एक बयान में, कहा, ‘‘चीन भूमिगत चर्च सदस्यों को गिरफ्तार करता है, भारत और पाकिस्तान में भीड़ हिंसा बढ़ रही है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं और उनके घर नष्ट हो रहे हैं, बर्मा की सेना पूजा स्थलों पर बमबारी कर रही है, और ताजिकिस्तान माता-पिता को अपने बच्चों को धर्म के बारे में सिखाने के अधिकार से वंचित कर रहा है।’’

इसमें कहा गया, ‘‘जैसा कि यूएससीआईआरएफ की वार्षिक रिपोर्ट से पता चलता है, प्रमुख देशों में बहुत से लोगों को अन्यायपूर्ण कानूनों, भेदभाव, उत्पीड़न, हिंसा और यहां तक ​​​​कि मानवता के खिलाफ अपराधों के माध्यम से धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित किया जा रहा है। अमेरिका सरकार को धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वाले लोगों के लिए विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता को आगे बढ़ाना जारी रखना चाहिए।’’

भाषा नेत्रपाल सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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