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Sunday, 5 April, 2026
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धर्म स्वातंत्र्य विधेयक किसी धर्म के विरूद्ध नहीं है: फडणवीस

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(तस्वीर के साथ)

मुंबई, 16 मार्च (भाषा) मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि महाराष्ट्र में प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य केवल बल, धोखाधड़ी या प्रलोभन के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।

विधानसभा में 13 मार्च को पेश किए गए महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2022 में विवाह की आड़ में किए जाने वाले गैरकानूनी धर्मांतरण के लिए सात साल के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि कभी कभी कानून व्यवस्था का मुद्दा बनने वाले धर्मांतरण के मामलों के सिलसिले में वह स्पष्टता लाना चाहते हैं।

विधेयक का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि ओडिशा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और झारखंड समेत कई राज्यों ने पहले ही इसी तरह के कानून बनाये हैं।

फडणवीस ने कहा, ‘‘यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धर्म का पालन करने के व्यक्ति के अधिकार को प्रतिबंधित नहीं करता है। धर्म के अधिकार में किसी अन्य व्यक्ति को जबरदस्ती, गलतबयानी, धोखाधड़ी या प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरित करने का अधिकार शामिल नहीं है।’’ उन्होंने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का भी हवाला दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल गैरकानूनी धर्मांतरण के उद्देश्य से किए गए विवाहों को न्यायालय द्वारा अमान्य घोषित किया जा सकता है।

विपक्षी शिवसेना (उबाठा) ने इस विधेयक को अपना समर्थन दिया है।

उसके विधायक भाष्कर जाधव ने कहा, ‘‘यह व्यापक है और अफवाहों या गलतफहमियों के बावजूद किसी विशिष्ट धर्म को लक्षित नहीं करता है। इसका उद्देश्य अनैतिक प्रथाओं और धर्म के दुरुपयोग को रोकना है जो व्यक्तियों या समुदायों को नुकसान पहुंचाते हैं।’’

उन्होंने कहा कि यह खबर कि विधेयक किसी खास धर्म के विरूद्ध है, गलत है।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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