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Saturday, 7 March, 2026
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यूपीएससी कोचिंग केंद्र के बिना सहमति अभ्यास साक्षात्कार प्रकाशित करने पर उठा सवाल

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नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) क्या कोई कोचिंग संस्थान किसी उम्मीदवार की सहमति के बिना उसका अभ्यास-साक्षात्कार ऑनलाइन प्रकाशित कर सकता है? यह सवाल उपभोक्ता मामलों के विभाग के समक्ष एक आरटीआई आवेदन के माध्यम से उठाया गया था, जिसमें कोचिंग केंद्रों द्वारा उम्मीदवारों के साक्षात्कार और व्यक्तिगत विवरणों के दुरुपयोग की ओर ध्यान दिलाया गया था।

सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दायर की गई इस याचिका में यह जानकारी मांगी गई थी कि क्या कोचिंग संस्थान यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान आयोजित उम्मीदवार के अभ्यास साक्षात्कार को अपलोड कर सकते हैं, भले ही उम्मीदवार बाद में इसके प्रकाशन पर आपत्ति जताए।

हालांकि, इसके जवाब में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा कि प्रश्न सलाह या स्पष्टीकरण मांगने की प्रकृति के थे और इसलिए, आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एफ) के तहत “सूचना” की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आते हैं।

बाद में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने इस जवाब को बरकरार रखा और यह देखते हुए अपील को खारिज कर दिया कि सार्वजनिक प्राधिकरण ने उचित जवाब दिया था।

आवेदक शशांक गौर ने विशेष रूप से पूछा था: “क्या इस मामले में कोचिंग को अभ्यास साक्षात्कार प्रकाशित करने का अधिकार है? क्या कोई उम्मीदवार अपने अभ्यास साक्षात्कार के प्रकाशन से इनकार कर सकता है? या क्या कोचिंग संस्थान उसकी सहमति के बिना उसका अभ्यास साक्षात्कार प्रकाशित कर सकता है?”

आरटीआई आवेदन में कहा गया था कि ऐसी स्थिति तब उत्पन्न हो सकती है जब कोई उम्मीदवार तैयारी के शुरुआती चरणों में अभ्यास साक्षात्कार देता है और खराब प्रदर्शन करता है, लेकिन बाद में सुधार करता है। यदि परिणाम घोषित होने के बाद पहले का साक्षात्कार प्रकाशित किया जाता है, तो यह उम्मीदवार की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर सकता है और सोशल मीडिया मंच पर प्रतिकूल टिप्पणियों को आमंत्रित कर सकता है।

आवेदन में एक और प्रश्न कोचिंग संस्थानों द्वारा प्रचार उद्देश्यों के लिए छात्रों के नामों के उपयोग से संबंधित था।

आवेदक ने पूछा था: “यदि छात्र ने खरीदे गए पाठ्यक्रम का उपयोग नहीं किया है और परिणाम घोषित होने के बाद, उम्मीदवार चाहता है कि उस विशेष पाठ्यक्रम के लिए उसके नाम का उपयोग न किया जाए, तो क्या कोचिंग केंद्र को छात्र का नाम प्रकाशित करने का अधिकार है? क्या छात्र की सहमति आवश्यक नहीं है?”

यह मुद्दा शुक्रवार को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम घोषित होने के साथ ही चर्चा में आया, ऐसे समय में जब कोचिंग संस्थान अक्सर प्रचार के उद्देश्य से उम्मीदवारों के साक्षात्कार और नामों का प्रचार करते हैं।

भाषा प्रशांत पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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