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Monday, 2 March, 2026
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वकील की मदद से प्राथमिकी तैयार करने से उसकी विश्वसनीयता पर असर नहीं पड़ता: अदालत

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लखनऊ, एक मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कहा है कि केवल इस आधार पर किसी प्राथमिकी की विश्वसनीयता पर संदेह नहीं किया जा सकता कि वह वकील की सहायता से तैयार की गई है।

इस टिप्पणी के साथ अदालत ने तेजाब हमले के मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि बरकरार रखी लेकिन उसकी सजा आजीवन कारावास से घटाकर 14 साल कर दी। इस हमले में दो महिलाओं की मौत हो गई थी।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति ए के चौधरी की पीठ ने प्रतापगढ़ के जगदंबा हरिजन की याचिका पर 27 फरवरी को यह फैसला सुनाया।

प्रतापगढ़ की सत्र अदालत ने दो महिलाओं पर तेजाब से हमला कर गैर इरादतन हत्या के मामले में अपीलकर्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

अपीलकर्ता का मुख्य तर्क था कि प्राथमिकी घटना के दो दिन बाद निजी वकील की सहायता से तैयार की गई थी, जिससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आती है।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि वकील की सहायता से प्राथमिकी तैयार होने मात्र से उसकी विश्वसनीयता स्वतः प्रभावित नहीं होती।

भाषा सं आनंद सिम्मी

सिम्मी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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