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Monday, 2 March, 2026
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जेकेएसए ने नर्सिंग कॉलेज में आ रही ‘दिक्कतों’ को लेकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा

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कुरनूल, एक मार्च (भाषा) आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित सरकारी नर्सिंग कॉलेज में कश्मीरी छात्रों के कथित उत्पीड़न के मामले में जम्मू कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

एसोसिएशन ने उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को भी अपनी शिकायत सौंपी, जिसमें आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री विशेष छात्रवृत्ति योजना (पीएमएसएसएस) के तहत नामांकित जम्मू कश्मीर के 13 मुस्लिम छात्रों को पर्याप्त सेहरी (भोर से पहले का भोजन) और इफ्तार (सूर्यास्त के रोजा तोड़ने का भोजन) से वंचित किया जा रहा है तथा देर रात ‘फूड डिलीवरी’ प्राप्त करने में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है।

जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने (जेकेएसए) नायडू को पत्र लिखकर कुरनूल के सरकारी नर्सिंग कॉलेज में कश्मीरी छात्रों के उत्पीड़न (जिसमें रमजान के भोजन की सुविधा से वंचित करना और हिजाब पर प्रतिबंध शामिल है) के संबंध में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और हमारा मानना ​​है कि प्रबंधन इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रहा है।’’

संगठन ने दावा किया कि कश्मीरी छात्रों को ‘‘आतंकवादी, संवेदनहीन, मूर्ख और बेवकूफ’’ जैसे शब्दों का सामना करना पड़ा है।

जेपीएसए के अनुसार, छात्रों ने आरोप लगाया कि रमजान के दौरान उनके उपयुक्त भोजन की मांगों को हल्के में लिया गया और रात 10 बजे के बाद ‘ऑर्डर’ की गई ‘फूड डिलीवरी’ कॉलेज के गेट पर रोक दी गई, जिससे वे भोजन के बिना रह गए। छात्राओं को कथित तौर पर अपना हिजाब हटाने के लिए कहा गया, जो मौलिक धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

खुएहामी ने कहा कि इस तरह के आचरण से छात्रों में भय, असुरक्षा और मानसिक तनाव पैदा हुआ, जिससे शैक्षणिक प्रदर्शन, समग्र कल्याण और उनकी सुरक्षा की भावना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

संगठन के अनुसार, भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्रावास के मेस से असहमति के बाद विवाद बढ़ गया, जिसमें चपाती और अन्य वस्तुओं की मांग भी शामिल थी। छात्रों का कहना है कि उन्हें पिछले दो हफ्तों से उचित भोजन नहीं मिल रहा है।

इस बीच, कुरनूल स्थित सरकारी नर्सिंग कॉलेज की प्रधानाचार्य आर पद्मावती ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सभी धर्मों के छात्रों के साथ समान व्यवहार किया जाता है और उन्हें अपने-अपने रीति-रिवाजों का पालन करने की अनुमति दी जाती है। उन्होंने भेदभाव के आरोपों का खंडन करते हुए दावों को निराधार बताया।

पद्मावती ने कहा, ‘‘यहां किसी प्रकार का उत्पीड़न नहीं होता क्योंकि हम केवल शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार कर रहे हैं।’’

जेकेएसए ने इस मामले में समयबद्ध जांच की मांग की है और राज्य सरकार से छात्रों के मौलिक अधिकारों एवं गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

भाषा

शुभम नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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