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Sunday, 1 March, 2026
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संगीत लाखों दिलों को एक लय में पिरोता है: उपराष्ट्रपति

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(फाइल फोटो के साथ)

त्रिशूर (केरल), एक मार्च (भाषा) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि भारत में संगीत एक ऐसा शक्तिशाली ‘‘सूत्र’’ है, जो लाखों दिलों को एक लय में पिरोता है।

उन्होंने यहां नादतारा में कुरियाकोस इलियास सर्विस सोसाइटी की पहल ‘गणाश्रम’ (संगीत-आध्यात्मिक केंद्र) के शिलान्यास समारोह में यह बात कही।

राधाकृष्णन ने कहा, “भारत की अपनी समृद्ध संगीत परंपरा है, जो हजारों साल पुरानी है। भारत का संगीत एक आध्यात्मिक सफर, ध्यान, प्रार्थना और जीवन का उत्सव है। संगीत लाखों दिलों को एक लय में पिरोता है।”

उन्होंने कहा कि भारत की बात करते समय “हम एक प्राचीन सभ्यता की बात करते हैं, जिसकी आत्मा संगीत में अपनी शुद्धतम अभिव्यक्ति पाती है।”

उन्होंने कहा, “वेदों के स्तोत्रों से लेकर संतों की भावपूर्ण अभिव्यक्तियों तक, संगीत हमारी सभ्यता में पवित्र गंगा की तरह बहता रहा है।”

उन्होंने कहा कि सामवेद के मंत्र दुनिया में व्यवस्थित संगीत के शुरुआती आधारों में से हैं।

उन्होंने कहा, “चोल राजाओं द्वारा निर्मित मंदिरों में प्राचीन दक्षिण भारत की संगीत संस्कृति के जीवंत प्रमाण मिलते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारत की संगीत विरासत अत्यंत प्राचीन है।”

उन्होंने कहा कि भारत में संगीत परंपराओं की बड़ी विविधता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर की हिंदुस्तानी और दक्षिण की कर्नाटक शास्त्रीय परंपराएं ध्वनि की गहन प्रणालियां हैं, जिन्हें सदियों से महान गुरुओं ने समृद्ध किया है।

उन्होंने कहा, “त्यागराज की अमर रचनाएं आज भी मन में नयी उमंग भर देती हैं। तानसेन की प्रतिभा इतिहास में गूंजती है। एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी के अलौकिक स्वर भारतीय संगीत को वैश्विक मंच तक ले गए, जबकि रवि शंकर के सितार ने दुनिया भर के लोगों को मंत्रमुग्ध किया।”

राधाकृष्णन ने कहा कि पश्चिमी संगीत हो या भारतीय, दुनिया भर में स्वर तो सात ही हैं।

उन्होंने कहा, “प्रत्येक सप्तस्वर हमारे भीतर की भावनाओं से जुड़ता है। एक सुकून देने वाला राग चिंता कम कर सकता है, भक्तिमय रचना मनोबल बढ़ा सकती है और जीवंत धुन ऊर्जा भर सकती है।”

उन्होंने कहा, “संगीत और ध्यान के जरिए सभी धर्मों के लोगों को एक आध्यात्मिक छत्र के नीचे लाने के लिए मैं गणाश्रम की सराहना करता हूं।”

राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में योग को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है।

उन्होंने कहा, “आज योग भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का प्रतीक बन गया है, जो राजनीति और सीमाओं से परे देशों को जोड़ने वाला सेतु है।”

इस अवसर पर केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और उच्च शिक्षा मंत्री आर. बिंदु ने भी संबोधित किया।

भाषा खारी दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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