प्रयागराज, 27 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पहलगाम हमले के बाद अपने इंस्टाग्राम खाते पर ‘‘पाकिस्तान जिंदाबाद’’ लिखकर ‘पोस्ट’ साझा करने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दे दी है।
हालांकि, अदालत ने उसे सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी पोस्ट साझा करने से रोक दिया है जो इस देश की प्रतिष्ठा के खिलाफ हो।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने फैजान नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर जमानत याचिका पर बृहस्पतिवार को यह आदेश पारित किया।
अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता सोशल मीडिया पर ऐसी कोई आपत्तिजनक पोस्ट साझा नहीं करेगा जो इस देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ हो।’’
अदालत ने यह चेतावनी भी दी कि किसी शर्त का उल्लंघन जमानत रद्द करने का आधार होगा।
आरोपी के खिलाफ एटा पुलिस द्वारा पिछले वर्ष भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
आरोपी के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने हालांकि आपत्तिजनक पोस्ट साझा की लेकिन बीएनएस की धारा 152 उस पर लागू नहीं होती क्योंकि उसने ऐसी कोई टिप्पणी साझा नहीं की जो भारत के लिए अपमानजनक हो।
उन्होंने कहा कि एक शत्रु देश का समर्थन करना बीएनएस की धारा 152 के दायरे में नहीं आएगा। वकील ने कहा कि आरोपी तीन मई, 2025 से जेल में निरुद्ध है और यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह आजादी का दुरुपयोग नहीं करेगा।
हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने जमानत याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि यह अपराध गंभीर प्रकृति का है।
अदालत ने अपराध की प्रकृति, साक्ष्य, जेलों में भारी संख्या में बंदियों के निरुद्ध रहने और निचली अदालतों के समक्ष भारी संख्या में लंबित मामलों पर विचार करते हुए आरोपी को जमानत प्रदान की।
भाषा सं राजेंद्र सिम्मी
सिम्मी
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