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Wednesday, 25 February, 2026
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अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क का सीमित असर रहेगा: सौर समाधान प्रदाता

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नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) अमेरिका के कुछ भारतीय सौर उत्पादों पर लगाए शुरुआती प्रतिपूर्ति शुल्क (सीवीडी) का उद्योग पर कोई महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और इसका असर सीमित रहेगा। सौर समाधान प्रदाता कंपनियों ने यह बात कही है।

विक्रम सोलर के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ज्ञानेश चौधरी ने कहा, ‘‘ हालिया अमेरिकी शुरुआती प्रतिपूर्ति शुल्क मुख्य तौर भारतीय सेल पर लागू होता है। हमारी अमेरिकी ऑर्डर की रणनीति भारतीय सेल की खरीद पर आधारित नहीं है। हम पहले से ही उस बाजार के लिए विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखला के साथ काम कर रहे हैं, जिसमें कम शुल्क जोखिम वाले देशों से खरीद शामिल है। इसलिए हम पर सीधा वित्तीय प्रभाव सीमित रहेगा।’’

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल द्वारा निकासी अवसंरचना को आसान बनाने के फैसले के बाद स्थापना की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है। हाल में गुजरात में बड़े पैमाने की परियोजना के लिए इंडियन ऑयल-एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी से 378.75 मेगावाट मॉड्यूल का ऑर्डर मिलना इसी मजबूती को दर्शाता है।

वारी एनर्जीज के समूह प्रमुख (वित्त) अभिषेक पारेख ने कहा, ‘‘ इस समय कंपनी को अपने अमेरिकी ऑर्डर बुक की सेवा देने की क्षमता पर किसी महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव की आशंका नहीं है। ’’

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा भारत से कुछ सौर आयात पर 126 प्रतिशत के शुरुआती प्रतिपूर्ति शुल्क लगाए जाने संबंधी हालिया मीडिया घोषणा के संदर्भ में है।

कंपनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों के दौरान, भारत से आयात पर पहले लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क के बावजूद अमेरिका के लिए निर्यात बढ़ाने का सिलसिला जारी रहा।

वारी एनर्जीज के अनुसार, वह चालू वित्त वर्ष के अंत तक अमेरिका में अपनी विनिर्माण क्षमता को लगभग 4.2 गीगावाट तक बढ़ाने की प्रक्रिया में है जो परिचालन विस्तार की समयसीमा एवं अन्य सामान्य कारकों पर निर्भर करेगी।

प्रीमियर एनर्जीज के मुख्य कारोबार अधिकारी विनय रुस्तगी ने कहा, ‘‘ कंपनी ने अपने व्यवसाय में निर्यात की हिस्सेदारी को लगभग शून्य तक कम कर दिया है और हमारे व्यवसाय पर किसी भी अमेरिकी शुल्क का कोई प्रभाव नहीं है।’’

उन्होंने बताया कि अमेरिकी नीति लगातार सभी आयात पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही है और इस जांच की घोषणा अगस्त, 2025 में की गई थी।

रुस्तगी ने कहा कि भारतीय विनिर्माताओं के पास अपनी बिक्री रणनीति और व्यावसायिक मॉडल को परिष्कृत करने के लिए काफी समय था।

भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में 2025 में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और वर्तमान में यह कुल भारतीय उत्पादन का केवल पांच से सात प्रतिशत ही होने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि इसलिए अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क की घोषणा का हम पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।

दत्ता पावर इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (परिचालन) तरुण पी. ने कहा, ‘‘ भारतीय सौर आयात पर अमेरिकी शुल्क से निर्यात धीमा हो सकता है और अतिरिक्त उत्पादन घरेलू बाजार में जा सकता है, जिससे मूल्य प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। हालांकि, इसका प्रभाव विनिर्माता के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, क्योंकि कई घरेलू विनिर्माता कम शुल्क वाले देशों से सेल आयात कर रहे हैं और निर्यात के लिए भारत में पैनल असेंबल कर रहे हैं।’’

गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत पर अनुचित सब्सिडी दिए जाने का आरोप लगाते हुए कुछ भारतीय सौर उत्पादों के आयात पर 125.87 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति शुल्क लगाने की घोषणा की है।

भाषा निहारिका अजय

अजय

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यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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