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Wednesday, 4 March, 2026
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शीर्ष गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में से 30 प्रतिशत तक सूचीबद्धता के योग्यः हुरुन इंडिया

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मुंबई, 24 फरवरी (भाषा) देश की शीर्ष 100 गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में से लगभग 25-30 प्रतिशत के पास ऐसा कारोबारी मॉडल और वृद्धि क्षमता है, जो उन्हें शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के लिए उपयुक्त बनाती है। हुरुन इंडिया के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही।

हालांकि, इनमें से किसी भी गैर-सूचीबद्ध कंपनी ने अभी तक अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की औपचारिक रूप से घोषणा नहीं की है।

हुरुन इंडिया के संस्थापक एवं मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने यहां पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि ‘आईपीओ-सक्षम’ होने का मतलब यह है कि कंपनियां आकार, शेयरधारक संरचना और वृद्धि की स्थिति के लिहाज से सार्वजनिक बाजारों के अनुरूप हैं।

इसके साथ ही जुनैद ने यह स्पष्ट किया कि आईपीओ लाने की औपचारिक घोषणा का अभाव कंपनियों की तैयारी की कमी को नहीं दर्शाता है।

इस अवसर पर जारी ‘जेएम फाइनेंशियल-हुरुन इंडिया अनलिस्टेड जेम्स 2026’ रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की कंपनियां इस सूची में सबसे अधिक हैं, जिसके बाद निर्माण एवं इंजीनियरिंग तथा वित्तीय सेवाएं क्षेत्र का स्थान है।

शीर्ष 10 कंपनियों में खुदरा कारोबार, डिजिटल कॉमर्स, विनिर्माण, बीमा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र की बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

सूची में शामिल 100 कंपनियों का संयुक्त राजस्व 2025 में 8.9 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2023 के 6.7 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है। यह दो वर्षों में 15.2 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर को दर्शाता है।

राजस्व के आधार पर रिलायंस रिटेल 2.7 लाख करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर रही। इसके बाद फ्लिपकार्ट (83,000 करोड़ रुपये) और मालाबार गोल्ड एवं डायमंड्स (66,000 करोड़ रुपये) का स्थान रहा।

भाषा प्रेम प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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