नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने गैर-निर्धारित उड़ानों के संचालकों (एनएसओपी) के लिए मंगलवार को कई सुरक्षा उपायों की घोषणा की, जिनमें विमानों के रखरखाव का इतिहास सार्वजनिक किया जाना और एक सुरक्षा रैंकिंग तंत्र का विकास शामिल है।
डीजीसीए ने हाल-फिलहाल में विमान हादसों की संख्या में वृद्धि के मद्देनजर यह कदम उठाया।
विमानन नियमक ने गैर-निर्धारित उड़ानों का संचालन करने वाली एक कंपनी की एयर एंबुलेंस के सोमवार को झारखंड में दुर्घटनाग्रस्त होने के एक दिन बाद ऐसे सभी संचालकों के साथ बैठक की। इस हादसे में दोनों पायलट सहित सात लोगों की मौत हो गई थी।
डीजीसीए ने एक बयान में कहा कि बैठक “विमान हादसों की संख्या में हाल ही में हुई वृद्धि को संबोधित करने और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देने के लिए आयोजित की गई थी।”
बयान के मुताबिक, बैठक में डीजीसीए ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि एनएसओपी के जवाबदेह प्रबंधकों और वरिष्ठ नेतृत्व को प्रणालीगत गैर-अनुपालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
इसमें कहा गया है कि विमानन नियामक ने इस बात पर जोर दिया कि “सुरक्षा संबंधी चूक का दोष केवल पायलट पर नहीं मढ़ा जा सकता।”
बयान के अनुसार, डीजीसीए ने कहा कि विमानों की उम्र और रखरखाव के इतिहास सहित महत्वपूर्ण सुरक्षा जानकारी को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाने की आवश्यकता के अलावा एनएसओपी की सुरक्षा रैंकिंग भी होगी।
इसमें कहा गया है कि एनएसओपी के पायलट को अनुपालन न करने पर कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा और यहां तक कि उनके लाइसेंस को पांच साल तक के लिए निलंबित भी किया जा सकता है।
डीजीसीए ने कहा कि एनएसओपी के पुराने विमानों के साथ-साथ स्वामित्व परिवर्तन से गुजर रहे विमानों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
भाषा पारुल माधव
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