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Thursday, 26 March, 2026
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कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में 2020 के दंगों पर आधिकारिक जांच आयोग के गठन की मांग की

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नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों के छह साल बाद, कार्यकर्ताओं और नेताओं ने सोमवार को दावा किया कि न्याय में देरी हो रही है, जांच त्रुटिपूर्ण है और कई प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास अपर्याप्त है।

घृणा अपराधों के पीड़ितों को कानूनी और सामाजिक सहायता प्रदान करने वाली मुहिम ‘कारवां-ए-मोहब्बत’ द्वारा आयोजित एक स्मृति कार्यक्रम में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हिंसा और उसके बाद के परिणामों से जुड़े प्रमुख सवालों का अभी तक समाधान नहीं हुआ है।

वर्ष 2020 में 23 से 27 फरवरी तक लगभग चार दिन तक हिंसा में 53 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए, साथ ही घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा।

कार्यकर्ताओं ने एक आधिकारिक जांच आयोग के गठन और सभी पीड़ितों, विशेष रूप से महिला प्रधान परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग की।

इस कार्यक्रम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा की पिछली घटनाओं के विपरीत, दिल्ली दंगों की कोई आधिकारिक जांच नहीं की गई।

करात ने दावा किया, ‘‘गुजरात हिंसा सहित विभिन्न घटनाओं के बाद जांच आयोग गठित किए गए थे। लेकिन 2020 के दंगों के बाद कोई आधिकारिक आयोग का गठन नहीं किया गया।’’

उन्होंने कहा कि कुछ जांच नागरिक संस्थाओं द्वारा कराई गईं, कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने कीं, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक जांच आयोग गठित नहीं किया गया है।

करात ने दावा किया कि कुछ प्रभावित परिवारों को तत्कालीन दिल्ली सरकार द्वारा घोषित राशि से कम राशि प्राप्त हुई।

पीड़ितों के अनुभवों को बयां करने वाले वृत्तचित्र भी इस कार्यक्रम में दिखाए गए। एक फिल्म मोहम्मद वकील पर केंद्रित थी, जिन पर दंगों के दौरान तेजाब से हमला किया गया था और उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी।

इस कार्यक्रम में मानवाधिकार कार्यकर्ता जॉन दयाल, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान पीड़ितों और राजनीतिक कैदियों के वृत्तांतों पर आधारित कई अन्य वृत्तचित्र भी दिखाए गए।

भाषा आशीष माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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