चंडीगढ़, 23 फरवरी (भाषा) आईडीएफसी फर्स्ट बैंक द्वारा हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का खुलासा किए जाने के एक दिन बाद विपक्षी कांग्रेस ने सोमवार को विधानसभा में यह मुद्दा उठाया, जिसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जांच की घोषणा की।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन से कहा कि जांच के आदेश दे दिए गए हैं और राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
सैनी ने कहा कि चाहे वह बैंक कर्मचारी हो या कोई सरकारी कर्मचारी, जो भी इसमें शामिल पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को कहा था कि उसने इस मामले की जानकारी बैंकिंग नियामक को दे दी है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है।
इसने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया, चंडीगढ़ स्थित एक विशेष शाखा में कुछ कर्मचारियों द्वारा हरियाणा राज्य सरकार के खातों के एक विशिष्ट समूह में अनधिकृत और धोखाधड़ी वाली गतिविधियां की गई हैं और इसमें संभवतः अन्य व्यक्ति/संस्थाएं/पक्ष भी शामिल हैं।’’
मुख्यमंत्री ने विधानसभा को बताया कि हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को सरकारी कामकाज संबंधी सूची से हटा दिया है।
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा विधानसभा में यह मुद्दा उठाया।
सैनी ने कहा कि अनियमितताएं पाए जाने के बाद सरकार ने तुरंत धनराशि को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है, चाहे वह बैंक कर्मचारी हो या कोई अन्य कर्मचारी, जो भी इसमें शामिल होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’’
हुड्डा ने कहा कि बैंक ने अनियमितताओं का पता लगाया। उन्होंने सरकार से सदन को यह बताने की मांग की कि उसने इस संबंध में क्या कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा, ‘‘हम इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) इसकी जांच कर रहा है। हमारी सरकार पारदर्शी तरीके से काम करती है। यह ऐसा मुद्दा नहीं है, जिसे हम हल्के में लेंगे।’’
धोखाधड़ी का विवरण देते हुए बैंक ने कहा कि हरियाणा सरकार का एक विभाग आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाता रखता था, और बैंक को एक अज्ञात तिथि को खाता बंद करने तथा शेष राशि को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध प्राप्त हुआ।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा कि एक प्रारंभिक आंतरिक समीक्षा की गई है और यह मामला ‘‘हरियाणा सरकार के अंतर्गत आने वाले सरकारी खातों के एक विशिष्ट समूह तक ही सीमित है,’’ जो चंडीगढ़ स्थित उक्त शाखा के माध्यम से संचालित होते हैं।
भाषा नेत्रपाल दिलीप
दिलीप
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