जयपुर, 20 फरवरी (भाषा) राजस्थान के जयपुर में तीन दिवसीय उत्सव ‘लोक कला संगम 2026 राजस्थान रै लोकरंग रो उजास’ शुक्रवार से शुरू हो गया। आयोजकों ने यह जानकारी दी।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान ‘लोक चौपाल’ मंच के तहत पहला सत्र ‘लोक जीवन की भारतीय अवधारणा’ विषय पर हुआ।
डॉ. इन्दुशेखर तत्पुरुष ने कहा कि विगत दो शताब्दियों में सभी के जीवन चिंतन में बड़ा बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि ‘फोक’ शब्द के अनुवाद के साथ लोक शब्द आया है जबकि लोक शब्द वह है जो लोकतंत्र में है, लोकप्रिय में है, यही लोक शब्द के सही व व्यापक मायने हैं।
दूसरे सत्र में ‘लोक दृष्टिः विचार, व्यवस्था और जीवन व्यवहार’ विषय पर नारायण सिंह राठौड़, डॉ. गीता तामोर व तनेराज सिंह सोढा ने विचार रखे।
वहीं शाम में लोक कलाकारों ने लोक संस्कृति की मनोरम छटा बिखेरी।
राजस्थान के विभिन्न अंचलों की दस लोक विधाओं की प्रस्तुति शिल्पग्राम के मंच पर दी गयी।
बृज वंदना के साथ यह सांस्कृतिक यात्रा शुरू हुई, जिसमें भजनों में गौ माता की महिमा का बखान हण्डू पहलवान व जगतसिंह ने किया।
लोक कला संगम के दूसरे दिन शनिवार को ‘राजस्थानी लोक: मन, मिट्टी और परंपरा का देशज संसार’ विषय पर पद्मश्री तिलक गिताई व अन्य लोग विचार रखेंगे।
इस कार्यक्रम का आयोजन संस्कार भारती, जवाहर कला केन्द्र एवं राजस्थान सरकार के पर्यटन, कला संस्कृति विभाग की सहभागिता में किया गया है।
भाषा पृथ्वी जितेंद्र
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