कानपुर, 19 फरवरी (भाषा) कानपुर पुलिस ने कम से कम नौ राज्यों में सक्रिय फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का बृहस्पतिवार को भंडाफोड़ कर चार लोगों को गिरफ्तार किया और 14 विश्वविद्यालयों से जुड़े लगभग 900 जाली अंकपत्र व दस्तावेज जब्त किए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि आरोपी यहां किदवई नगर स्थित ‘शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन’ नामक कार्यालय से यह गिरोह संचालित कर रहे थे। गिरोह कथित तौर पर उम्मीदवारों को परीक्षा दिए बिना हाईस्कूल (10वीं) से लेकर बीटेक, बी फार्म और एलएलबी जैसे पाठ्यक्रमों तक के अकादमिक प्रमाणपत्र उपलब्ध कराता था।
बरामद जाली दस्तावेजों में छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय की 357 फर्जी डिग्रियां शामिल हैं, जो किसी एक संस्थान से जुड़ी सबसे अधिक संख्या है।
पुलिस ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड तथा उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के कई निजी विश्वविद्यालयों के नाम पर जारी जाली प्रमाणपत्र भी बरामद किए।
पुलिस के अनुसार, एमएससी स्नातक और गणित शिक्षक एवं कथित सरगना शैलेन्द्र कुमार (36) पहले छात्रों को निजी परीक्षा फॉर्म भरने में मदद करता था और बाद में फर्जी डिग्री के कारोबार में उतर गया।
उसने कथित तौर पर विश्वविद्यालयों के लिपिकों और कर्मचारियों का नेटवर्क बना लिया था, जो मांग पर असली मार्कशीट और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराते थे।
आयुक्त लाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि गिरोह बिना परीक्षा के हाईस्कूल व इंटर प्रमाणपत्र के लिए 50,000 रुपये, स्नातक डिग्री के लिए 75,000 रुपये तक, बीटेक और एलएलबी के लिए 1.5 लाख रुपये तथा बी फार्म और डी फार्म के लिए 2.5 लाख रुपये तक वसूलता था ।
पुलिस ने 45 वर्षीय शैक्षिक परामर्शदाता आनंद श्रीवास्तव की मौत का भी जिक्र किया, जिनका शव 19 फरवरी 2025 को हरबंस मोहाल इलाके के एक होटल कमरे में मिला था।
अधिकारियों के अनुसार वह कथित तौर पर गिरोह के संपर्क में था और मध्यप्रदेश के एक विश्वविद्यालय से अंकपत्र उपलब्ध कराने में मदद करता था।
पुलिस ने कम से कम 10 वकीलों की पहचान की है। इसमें चमनगंज में मनामा नामक अस्पताल संचालित करने वाला नौशाद भी शामिल है, जिन्होंने कथित तौर पर गिरोह के जरिए फर्जी एलएलबी डिग्री हासिल की। उनकी शैक्षणिक योग्यता की जांच की जा रही है और अग्रिम कानूनी कार्रवाई संभव है।
धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े प्रावधानों के तहत किदवई नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस हैदराबाद, गाजियाबाद और छतरपुर समेत अन्य स्थानों पर मौजूद नेटवर्क के सदस्यों का पता लगाने में जुटी है।
आयुक्त ने कहा, “गिरोह में शामिल विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की पहचान के लिए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
भाषा सं जफर खारी
खारी
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