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Wednesday, 25 March, 2026
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रामपुर सीआरपीएफ शिविर आतंकी हमला मामले में न्यायालय उप्र की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत

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नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें 2007 के रामपुर सीआरपीएफ शिविर आतंकी हमले के मामले में चार आरोपियों को दी गई मौत की सजा और एक अन्य को दी गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया गया था।

रामपुर स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के शिविर पर 31 दिसंबर 2007 की रात को हुए हमले में आठ सीआरपीएफ जवान मारे गए थे और पांच घायल हो गए थे।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य द्वारा दायर याचिका पर आरोपियों को नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी।

पांचों आरोपियों की ओर से अधिवक्ता एम एस खान पेश हुए।

राज्य ने पिछले साल 29 अक्टूबर को उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती दी है।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें इस मामले में चार लोगों को मृत्युदंड और एक अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

अदालत ने मोहम्मद शरीफ, सबाउद्दीन, इमरान शहजाद, मोहम्मद फारूक और जंग बहादुर खान को हत्या और अन्य गंभीर आरोपों से यह कहकर बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष ‘‘आरोपियों के खिलाफ मुख्य अपराध के मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा’’।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने जंग बहादुर खान समेत पांचों को शस्त्र अधिनियम की धारा 25 (1-ए) के तहत दोषी पाया और उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। जंग बहादुर खान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

भाषा सुरभि गोला

गोला

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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