scorecardresearch
Wednesday, 25 March, 2026
होमदेशजम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में अपनी टिप्पणियों को लेकर खेद जताया

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में अपनी टिप्पणियों को लेकर खेद जताया

Text Size:

(तस्वीर के साथ)

जम्मू, 11 फरवरी (भाषा) जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा की कार्यवाही के दौरान की गई टिप्पणियों पर बुधवार को खेद व्यक्त करते हुए कहा कि ये बयान आवेश में दिए गए थे और अगर इन्हें रिकॉर्ड से हटा दिया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मैं इसे अध्यक्ष पर छोड़ता हूं। यदि मैंने कल अपने भाषण में किसी असंसदीय शब्द का प्रयोग किया है, तो उसे रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। मुझे कोई आपत्ति नहीं है।’’

विधानसभा में बुधवार को दूसरे दिन भी हंगामा देखने को मिला जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने उनके खिलाफ ‘‘असंसदीय’’ टिप्पणियों के लिए मुख्यमंत्री अब्दुल्ला से माफी मांगे जाने की मांग की और प्रश्नकाल के दौरान विरोध में सदन से बाहर चले गए।

अब्दुल्ला ने सदन में कहा, ‘‘जहां तक ​​इस मामले का संबंध है, कभी-कभी भावनाओं में बहकर बातें कह दी जाती हैं। मेरी बातों से उन्हें दुख पहुंचा और मुझे इसका अफसोस है। हालांकि, मैंने जो कुछ भी कहा, वह उनके बारे में था; मैंने उनके परिवार के किसी भी सदस्य को इसमें शामिल नहीं किया। उनके ‘फील्ड कमांडरों’ ने जाते समय मेरे माता-पिता और मेरे दिवंगत दादाजी को इसमें घसीट लिया लेकिन मैं इसे भी जाने देता हूं।’’

मुख्यमंत्री के बयान से पहले भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा ने कहा कि उनका मानना ​​है कि (उनकी पार्टी के विधायकों द्वारा) कोई भी गंभीर टिप्पणी नहीं की गयी थी और उन्होंने कहा कि हो सकता है कि ‘‘जबान फिसल’’ गयी हो।

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि उनके सभी दलों के विधायकों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं और वह पिछले डेढ़ साल से सभी विधायकों से बातचीत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर मुझे पहले बोलने का मौका दिया गया होता, तो मैं स्पष्टीकरण देता और अपनी टिप्पणी वापस ले लेता लेकिन उस समय मुझे ऐसा करने का अवसर नहीं दिया गया।’’

मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी को दोहराते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वह सभी क्षेत्रों के मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दिया है लेकिन उनमें से कुछ का जवाब देना मुश्किल था।

उन्होंने आगाह किया कि सदन में व्यवधान से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण सहित प्रमुख विभागों से संबंधित अनुदानों के पारित होने में बाधा आ सकती है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं को उपेक्षित महसूस नहीं कराना चाहते।

भाषा

गोला सिम्मी

सिम्मी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments