गुवाहाटी, छह फरवरी (भाषा) शिक्षाविदों, चिकित्सकों, लेखकों और सेवानिवृत्त नौकरशाहों समेत 40 से ज्यादा जाने-माने नागरिकों ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय से अपील की है कि वह असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के एक खास समुदाय के खिलाफ हालिया बयानों पर स्वत: संज्ञान ले।
उन्होंने कहा कि ‘‘संवैधानिक उल्लंघनों के खिलाफ चुप्पी या निष्क्रियता” संविधान की नैतिक शक्ति को कमजोर कर सकती है’’।
बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार को लिखे एक पत्र में, नागरिकों ने शर्मा के कई सार्वजनिक बयानों की ओर उच्च न्यायालय का ध्यान दिलाया, ‘‘जो प्रथम दृष्टया नफरती भाषण, सरकारी धमकी और एक खास समुदाय को खुलेआम बदनाम करने जैसे हैं।’’
पत्र में मुख्यमंत्री की ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुसलमानों) के खिलाफ टिप्पणियों का जिक्र किया गया है।
पत्र में कहा गया कि बांग्ला भाषी मुसलमान 100 से ज्यादा वर्षों में ‘‘व्यापक तौर पर असमिया समाज का हिस्सा’’ बन गए हैं, और मुख्यमंत्री शर्मा के बयान ‘‘अमानवीय, सामूहिक रूप से बदनामी और राज्य प्रायोजित उत्पीड़न की धमकियों वाले प्रतीत होते हैं, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।’’
‘मियां’ मूल रूप से असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है। गैर-बांग्ला भाषी लोग इन लोगों को आमतौर पर बांग्लादेशी प्रवासी के रूप में पहचानते हैं।
भाषा शफीक पवनेश
पवनेश
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