चेन्नई, तीन फरवरी (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने कहा है कोई भी तमिल व्यक्ति उस पर किसी भाषा को थोपे जाने को कभी स्वीकार नहीं करेगा, हालांकि वह अपनी इच्छा से अन्य भाषाएं सीखता है और दूसरी भाषाओं का विरोध नहीं करता।
न्यायमूर्ति आनंद वेंकटेश ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने हाल में अपने बेटे के साथ तमिल फिल्म ‘पराशक्ति’ देखी थी, जिसमें 1960 के दशक के हिंदी विरोधी आंदोलन को दर्शाया गया था।
न्यायाधीश ने बताया कि फिल्म देखने के बाद उन्होंने अपने बेटे से पूछा कि क्या उसे भाषा संघर्ष के बारे में पता है। जब उसने जवाब दिया कि उसे इसकी जानकारी नहीं है, तो न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई और वह अपने कर्तव्य में असफल भी हुए। उन्होंने कुछ दिन पहले यहां कानून के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह इतिहास सभी को पता होना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वरिष्ठ अधिवक्ता एन आर एलंगो की तरह, हम सभी जानते हैं कि अंग्रेजी जाने बिना तमिलनाडु से आगे बढ़ना मुश्किल होगा।’’
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘एक तमिल भाषी अन्य भाषाओं का विरोध नहीं करता, बल्कि अपनी इच्छा से अन्य भाषाएं भी सीखता है। हालांकि, मेरी भाषा (तमिल) की प्राचीनता और इससे जुड़े मेरे गौरव को ध्यान में रखते हुए, यदि कोई अन्य मुझ पर कोई भाषा थोपता है, तो मैं उसे कभी स्वीकार नहीं करूंगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अपना सिर ऊंचा करके कहो कि मैं तमिलभाषी हूं, और जब भाषा का अपमान हो, तो आपको आवाज उठानी चाहिए, तथा हर परिस्थिति में भाषा की रक्षा करना और उसे कभी न भूलना हमारा कर्तव्य है।’’
भाषा आशीष दिलीप
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