बेंगलुरु, दो फरवरी (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने घृणास्पद भाषण एवं घृणा अपराध (निवारण) विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास ठंडे बस्ते में डालने के लिए भेज दिया है।
संबंधित विधेयक में घृणा संबंधी अपराध के मामले में एक लाख रुपये तक के जुर्माने और कम से कम सात साल कैद की सजा का प्रावधान है।
बेलगावी में शीतकालीन सत्र के दौरान दोनों सदनों द्वारा पारित किए गए विधेयक को दिसंबर 2025 के अंत में गहलोत के पास भेज दिया गया था।
परमेश्वर ने यहां पत्रकारों से कहा कि राज्यपाल ने विधेयक के 28 बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं और इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर राष्ट्रपति अपनी टिप्पणियों के साथ इस विधेयक को हमें वापस भेजती हैं, तो हम कुछ कार्रवाई करेंगे और इसे (राज्यपाल की सहमति के लिए) फिर से भेजेंगे।’’
परमेश्वर ने कहा, ‘‘हमें बोलने की स्वतंत्रता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी कुछ भी कह सकता है। हमें यह देखना होगा कि इसका हमारे समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसीलिए यह विधेयक पेश किया गया है।’’
उनके अनुसार, नफरती भाषण के ऐसे मामले सामने आए, जिसके कारण सरकार ने कानून लाने के बारे में सोचा।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप (भाजपा) अब भी कहते हैं कि यह उचित नहीं है, तो आपके इरादे क्या हैं? क्या इसका मतलब यह होना चाहिए कि कोई भी किसी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल कर सकता है?’’
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल चाहते हैं कि यह विधेयक कभी लागू न हो।
परमेश्वर ने कहा, ‘‘मेरी राय में राज्यपाल ने जानबूझकर इसे राष्ट्रपति के पास भेजा है, ताकि यह लागू न हो सके। वह इसे हमेशा के लिए टालना चाहते हैं।’’
भाषा यासिर नेत्रपाल
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