रांची: सात साल के एलेक्स मुंडा अपने दो कमरे के मिट्टी के घर के बाहर एक छोटे नीले प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठे हैं. वे ज़ोर-ज़ोर से अपनी किताब पढ़ रहे हैं — “डॉट, पॉट, लॉट, गॉट.” जल्दी ही शाम होगी और घर अंधेरे में डूब जाएगा. दिसंबर में उनकी पढ़ाई करते हुए एक तस्वीर वायरल होने के बाद अब वह उस निऑन रोशनी वाले पेट्रोल पंप पर नहीं पढ़ते, जहां उनकी मां काम करती हैं. वो जगह, जिसने उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक की नज़र में ला दिया था, अब उनके लिए बंद हो गई है.
नूतन टोप्पो, जो रांची के सुकुरहुड़ु हिंदुस्तान पेट्रोलियम स्टेशन पर पेट्रोल पंप अटेंडेंट के रूप में काम करती हैं, उन्होंने कहा, “अब भी लोग आते हैं और एलेक्स के बारे में पूछते हैं. कभी-कभी उन्हें डर लगता है, इसलिए अब मैं उसे घर पर रखती हूं.” उनके पति का निधन 2018 में हो गया था. तब से उन्होंने एलेक्स को अकेले पाला है.
पिछले तीन सालों से, एलेक्स स्कूल के बाद पेट्रोल पंप पर खेलते, खाना खाते और स्कूल का काम करते थे. पिछले महीने, एक ग्राहक जो अपनी बाइक में पेट्रोल भरवाने आया था, उन्होंने एलेक्स को पढ़ते हुए देखा. उनकी फोटो और वीडियो ली और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिए. यह कहानी झारखंड और बाहर के लोगों के दिल को छू गई. साथ ही, इसने उस चर्चा को भी शुरू किया कि जब आदिवासी परिवारों को मूल सरकारी सेवाएं भी नहीं मिलतीं, तो उन्हें अस्थायी उपाय अपनाने पड़ते हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उस फोटो पर एक्स पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने रांची के उप आयुक्त मंजुनाथ भजनत्रि को आदेश दिया कि “एलेक्स की पढ़ाई के लिए हर संभव मदद दी जाए.” स्कूल की फीस माफ हो गई और बिजली कनेक्शन “प्रक्रिया में” है. मीडिया कर्मी, यूट्यूबर, पंचायत सदस्य और डीसी कार्यालय के अधिकारी सभी उस बच्चे को देखने के लिए पहुंचे जो पेट्रोल पंप की मंद रोशनी में पढ़ता था. सोशल मीडिया पोस्ट में #RealLifeHeroes और #StruggleToSuccess जैसे हैशटैग इस्तेमाल किए गए.
दैनिक जागरण ने वीडियो का टाइटल रखा, ‘Under petrol pump lights, a mother teaches her son and lights his future’ (पेट्रोल पंप की रोशनी में मां बेटे को पढ़ाती है, और उसका भविष्य रोशन करती है).
सत्ता सुधार ने लिखा, ‘मां की मेहनत, एलेक्स मुंडा का सपना’.

40 साल के बालित कुमार, जो पेट्रोल पंप के प्रबंधक हैं, उन्होंने कहा, “पेट्रोल पंप हमेशा से एलेक्स की जगह रहा है. ठीक वैसे ही जैसे यह उनकी मां के काम करने की जगह है. अब लोग यहां ज्यादा आते हैं एलेक्स के बारे में पूछने के लिए, न कि पेट्रोल के बारे में जानने के लिए.
फिलहाल, इससे एलेक्स के लिए अलगाव बढ़ गया है. अब वह शायद ही पेट्रोल पंप जाते हैं. कैमरों और सवालों के बीच खुद को बचाने के लिए वह वहां कम ही दिखते हैं.
एलेक्स ने कहा, “मम्मी जब बाहर जाती हैं, मैं बाहर बैठता हूं. अंदर अंधेरा होता है.” वे सूर्यास्त से पहले आज की पढ़ाई खत्म करने की जल्दी में थे.
पेट्रोल पंप क्यों
जटिल कागज़ी प्रक्रियाएं मुख्य कारण हैं कि परिवार का घर अब भी अंधेरे में है. पति के निधन के बाद बिजली का कनेक्शन कभी टोप्पो के नाम पर नहीं हुआ. प्रक्रिया संबंधी अड़चनों और बकाया बिलों के कारण सप्लाई कट गई.
टोप्पो ने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर घर के अंदर का हाल दिखाया. पहले कमरे में दो छोटे लाल प्लास्टिक की कुर्सियां और एक पलंग दीवार के पास रखा है. दूसरा कमरा दिन में भी अंधेरे से घिरा रहता है. एक कोने में मिट्टी का चूल्हा और रसोई के लिए लकड़ी के बंडल रखे हैं.
टोप्पो ने कहा, “हम ज़्यादातर मोमबत्ती और इमरजेंसी लाइट का इस्तेमाल करते हैं. मैं उन्हें पेट्रोल पंप पर या पड़ोसी के घर चार्ज करती हूं.”
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कई बार अपने नाम नया कनेक्शन लेने की कोशिश की, लेकिन यह कागज़ात का लंबा और मुश्किल रास्ता बन गया.
उन्होंने कहा, “हमेशा कोई न कोई दस्तावेज़ नहीं होता था या मुझे किसी दूसरे दिन आने को कहा जाता था. कई बार कोशिश करने के बाद, मैंने बस जाना ही बंद कर दिया.”
फोटो वायरल होने के बाद चीज़ें चलने लगीं. टोप्पो ने कहा, “21 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशों के बाद मुझे रांची के उप आयुक्त मंजुनाथ भजनत्रि के कार्यालय से कॉल आया. मैं उनसे उनके कार्यालय में मिली.”

टोप्पो ने कहा कि भजनत्रि ने उन्हें आश्वासन दिया कि उन्हें बिजली मिलेगी. परिवार को जल्द ही आंबेडकर आवास योजना के तहत स्थायी घर भी मिलेगा.
उन्होंने कहा, “डीसी कार्यालय के अधिकारी हमारे घर और एलेक्स के स्कूल आए. उन्होंने मदद की और प्रक्रिया शुरू कर दी. उन्होंने मुझे कुछ फॉर्म भरने को दिए. अब एलेक्स को अपनी पढ़ाई के लिए फीस नहीं देनी पड़ेगी.”
रांची में पेट्रोल पंप की रौशनी में पढ़ने वाले बच्चे एलेक्स मुंडा और उनकी मां नूतन टोप्पो के संघर्ष की कहानी आपलोगों ने देखी। मामले में मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी ने संज्ञान लिया। उसके बाद आज रांची DC मंजूनाथ भजन्त्री ने उन्हें बुलाया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। फ़िलहाल… pic.twitter.com/nN2sw8KHtn
— Sunny Sharad (@sunny_sharad) December 22, 2025
अनिता मुंडा, गांव की पंचायत मुखिया, ने कहा बताया कि वे टोप्पो को हर संभव मदद दे रहे हैं. उनके घर गए, विधवा पेंशन योजना, राशन कार्ड के फॉर्म भरने में मदद की और अधिकारियों से बिजली जल्दी मिलने के लिए समन्वय किया.
इस आदिवासी क्षेत्र में अधिकांश लोग दैनिक मजदूरी करते हैं. वे एक दिन का वेतन गंवाए बिना सरकारी दफ्तरों का चक्कर नहीं काट सकते.
अनिता मुंडा ने कहा, “हम सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें पूरे दिन सरकारी दफ्तरों में बिताने की ज़रूरत न पड़े. सुविधाएं हैं, लेकिन कभी-कभी लोग लंबी प्रक्रियाओं का सामना नहीं करना चाहते. जब वे सरकारी कार्यालयों में जाते हैं, तो कोई आसानी से उनकी नहीं सुनता.”
उन्होंने बताया कि गांव में 11 वार्ड हैं. एलेक्स जहां रहते हैं, वार्ड नंबर 1 सबसे पिछड़ा और मुख्य रूप से अनुसूचित जनजाति का क्षेत्र है. यहां के कई पुरुष बेरोज़गार हैं और शराब की लत से जूझ रहे हैं.
अनिता मुंडा ने कहा, “लोग काम करने या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक नहीं चाहते, क्योंकि पुरुष अक्सर शराब के प्रभाव में रहते हैं.”
इस बीच, लंबी प्रक्रिया ने गांव में निराशा पैदा कर दी है. कुछ लोग टोप्पो का मज़ाक भी उड़ाते हैं.
टोप्पो ने कहा, “लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मुझे सच में कुछ मिला या केवल वादे ही मिले, जैसे कई अन्य लोगों को.”
आशावादी
मरून साड़ी में 40 साल की सरिता देवी अपने कच्चे घर की दीवार से टिककर खड़ी हैं. वह रोज़ाना इकट्ठा होने वाली भीड़ को देखती हैं जो एलेक्स के घर के सामने जमा होती है. लोग वीडियो बनाते हैं, सवाल पूछते हैं और कभी-कभी सरिता देवी के पास भी आते हैं.
सरिता देवी ने कहा, “कुछ अधिकारियों ने हमारे घर का दौरा किया. उन्होंने कहा कि कुछ हज़ार रुपये के बिल बकाया हैं. उन्हें चुकाने के बाद ही बिजली फिर से मिलेगी. हमारे पास पैसे नहीं हैं और हमें नहीं पता था कि आगे क्या करें.”
आठ महीने से अधिक समय तक, परिवार बिना बिजली के रहा है. वे इसे सह रहे थे क्योंकि नया घर बनने वाला था, लेकिन एलेक्स का वीडियो वायरल होने और अधिकारियों के क्षेत्र में आने के बाद, सरिता देवी को अब उम्मीद है कि उनके घर पर भी ध्यान दिया जाएगा.
पंचायत मुखिया अनिता मुंडा ने कहा कि गांव में कई घर अब भी बिजली से वंचित हैं. इसका मुख्य कारण है कि लोगों को प्रक्रिया की जानकारी नहीं है. वे अब अन्य परिवारों को भी मदद कर रही हैं. वे दस्तावेज़ों की कमी और बकाया बिलों में सहायता देती हैं.
अनिता मुंडा ने कहा, “लोग मदद मांगने में हिचकते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि उनकी अनदेखी होगी, लेकिन अब एलेक्स की वजह से कई अन्य लोगों को मदद मिल रही है.”
नवीन मुंडा, एक अन्य पड़ोसी, अपने अधूरे घर के बाहर बैठे हैं. उन्होंने भी अपने चार सदस्यीय परिवार के लिए नया बिजली कनेक्शन लिया है. मीडिया कर्मियों और अधिकारियों की भीड़ ने उन्हें आशावादी बना दिया है.
नवीन मुंडा ने कहा, “हमारे घर भी जल्दी बिजली आएगी. एलेक्स ने खुद को और पूरे गांव को प्रसिद्ध बना दिया है.”

एलेक्स का सपना
टोप्पो ने बताया कि अब एलेक्स पेट्रोल पंप के आसपास स्वतंत्र रूप से घूम नहीं सकते. इसलिए उन्हें अपनी दिनचर्या बदलनी पड़ी है. अब वह सुबह की शिफ्ट में काम करती हूं, ताकि दोपहर तक घर लौटकर एलेक्स के साथ रह सके.जब उन्हें शाम को काम करना पड़ता है, तब एलेक्स को घर में एक छोटे कमरे में रखा जाता है. टोप्पो के सहकर्मी अक्सर एलेक्स की देखभाल करते हैं और होमवर्क में मदद करते हैं.

पेट्रोल पंप कर्मी 28 साल के सुशील तिवारी ने कहा, “हमने उसे यहां बड़ा होते देखा है और वह हमारे बच्चे जैसा है.”
एलेक्स पूरी तरह से भीड़ और मीडिया को नहीं समझ पाते हैं, जब लोग उसके पास आते हैं और सवाल पूछते हैं, वह शर्मीली मुस्कान देते हैं या अपनी मां के पीछे छिप जाते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा, वे घर में टीवी आने की उम्मीद को लेकर उत्साहित है—बिजली मिलने से भी ज्यादा.
एलेक्स ने कहा, “जब बिजली आएगी, एक टीवी लेंगे और कार्टून देखेंगे.”

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