नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने नीट पीजी -2025 में स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए पात्रता कट-ऑफ अंकों को कम करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कम ‘कट-ऑफ’ से विशेषज्ञता पाठ्यक्रमों में शामिल होने वाले चिकित्सा पेशेवरों की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने हालांकि कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य आगे के कौशल का विकास करना है, न कि डॉक्टरों की गुणवत्ता का आकलन करना।
इसने याचिकाकर्ता से देश में आवश्यक डॉक्टरों की संख्या के बारे में भी सवाल किया और कहा कि वह कुछ सीट रिक्त रहने देगी।
पीठ ने कहा, ‘‘क्या इन सीट को रिक्त छोड़ना जनहित में होगा? नहीं, हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।’’
इसने कहा, ‘‘हमारे पास एकमात्र तर्क यही है कि ‘कट-ऑफ’ अंकों को कम करने से कम योग्यता वाले एमबीबीएस डॉक्टर स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के लिए आगे आएंगे। उच्च शिक्षा प्रदान करने का उद्देश्य क्या है? उद्देश्य यह है उन्हें किसी क्षेत्र में अधिक कुशल बनाना। यह परीक्षा स्वतः ही किसी डॉक्टर की योग्यता का आकलन नहीं करती।’’
प्रतिवादी अधिकारियों के वकील ने कहा कि नियमों के अनुसार शैक्षणिक वर्ष में रिक्त सीट को भरने के लिए अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ाकर ‘कट-ऑफ’ को कम करने की अनुमति है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय में दायर की गई इसी तरह की एक याचिका पर अभी सुनवाई होनी बाकी है।
एनबीईएमएस द्वारा 2025-26 के नीट-पीजी परीक्षा के लिए सभी श्रेणियों के अभ्यर्थियों के ‘कट-ऑफ’ प्रतिशत को काफी कम करने का निर्णय।
देशभर में स्नातकोत्तर चिकित्सा की 18,000 से अधिक सीट खाली रहने के कारण, राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) ने इस महीने नीट-पीजी 2025 प्रवेश के लिए अर्हता प्रतिशत को संशोधित किया है।
भाषा
देवेंद्र प्रशांत
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