नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा की तस्वीरों और पहचान का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने अंतरिम आदेश में सभी ऑनलाइन मंचों को उनकी तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया।
पाहवा ने याचिका में शिकायत की थी कि एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप पर उनकी तस्वीर लगा रखी थी।
याचिका में बताया गया कि इस खाते में उनकी तस्वीर डिस्प्ले पिक्चर के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी और इसके जरिए फर्जी निवेश योजनाओं के माध्यम से भोले-भाले लोगों को बहला-फुसलाकर ठगने के लिए ‘मनगढ़ंत लेख’ प्रकाशित किए जा रहे थे।
याचिका में आरोप लगाया गया कि वह व्यक्ति पाहवा के नाम व पहचान का अनाधिकृत रूप से उपयोग करते हुए कई व्हाट्सएप ग्रुप और मोबाइल एप्लिकेशन चला रहा था, जिसका उद्देश्य ‘एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी को विश्वसनीयता प्रदान करना’ था।
याचिका ने बताया गया कि ऐसे कृत्यों से जनहित को गंभीर खतरा है और पाहवा की प्रतिष्ठा अपूरणीय क्षति पहुंची है।
याचिका में उस व्यक्ति को उनकी पहचान और प्रचार अधिकारों के दुरुपयोग से रोकने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया।
याचिका में बताया गया, “वादी विकास पाहवा 33 वर्षों से अधिक के पेशेवर अनुभव वाले एक अत्यंत सम्मानित वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वादी ने दशकों की नैतिक कानूनी प्रथाओं व राष्ट्रीय महत्व के कई महत्वपूर्ण मामलों से जुड़े रहने के कारण कानूनी बिरादरी और आम जनता के बीच राष्ट्रीय स्तर पर एक सुस्थापित प्रतिष्ठा प्राप्त की है।”
याचिकाकर्ता के मुताबिक, “प्रतिवादी संख्या एक के कृत्य वादी की फोटो पर कॉपीराइट का उल्लंघन, वादी के व्यक्तित्व व प्रचार अधिकारों का दुरुपयोग और अनुचित प्रतिस्पर्धा का गठन करते हैं। इस तरह का बेईमान आचरण जनता को धोखा देने, वादी की कड़ी मेहनत से अर्जित प्रतिष्ठा को धूमिल करने, वादी को गंभीर मानहानि व कानूनी नुकसान पहुंचाने और वादी के खर्च पर प्रतिवादी संख्या एक को अनुचित रूप से समृद्ध करने के इरादे से किया गया है।”
भाषा जितेंद्र माधव
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